
रंजन कुमार सिंह
OBC Creamy Layer : भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण सवाल उठाया है कि क्या दो आईएएस अधिकारियों के बच्चों को भी आरक्षण का लाभ मिलता रहना चाहिए। इस टिप्पणी ने देशभर में एक दिलचस्प बहस को जन्म दिया है और सामाजिक, राजनीतिक तथा कानूनी क्षेत्रों में इस विषय पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य ऐतिहासिक रूप से वंचित और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को अवसर प्रदान करना रहा है। हालांकि, न्यायालय की इस टिप्पणी के बाद यह प्रश्न फिर से चर्चा में आया है कि जिन परिवारों ने शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर ली है, क्या उन्हें भी समान रूप से आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।
सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि आरक्षण का लाभ उन लोगों तक अधिक पहुंचना चाहिए जो अब भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। वहीं, अन्य लोगों का कहना है कि सामाजिक भेदभाव और ऐतिहासिक असमानताओं को केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं आंका जा सकता। यह बहस समानता, सामाजिक न्याय और आरक्षण नीति के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने ला रही है। कई लोग इसे देश में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और उसके प्रभाव पर विचार करने का अवसर भी मान रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ओबीसी आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ पर सुनवाई करते हुए कहा है कि जिन बच्चों के माता-पिता दोनों आईएएस (IAS) अधिकारी हैं, उन्हें आरक्षण की क्या आवश्यकता है। कोर्ट ने कहा कि जब परिवार आर्थिक और शैक्षणिक रूप से मजबूत हो जाता है, तो उनके बच्चों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। यह पूरा मामला कर्नाटक हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर याचिका से जुड़ा है। कैंडिडेट की पृष्ठभूमि: याचिकाकर्ता कर्नाटक के ‘कुरुबा’ समुदाय (OBC में शामिल) से है। उसके माता-पिता दोनों राज्य सरकार में कर्मचारी थे और उनकी संयुक्त वार्षिक आय क्रीमी लेयर की तय सीमा (वर्तमान में आठ लाख रुपये) से अधिक थी। जाति प्रमाण पत्र रद्द: आय सीमा से अधिक होने के कारण अधिकारियों ने उसे ‘क्रीमी लेयर’ का माना और उसका जाति प्रमाण पत्र रद्द कर दिया था। इसके बाद कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी अधिकारियों के फैसले को सही ठहराया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने सवाल उठाया कि यदि माता-पिता पहले ही आरक्षण का लाभ लेकर आईएएस जैसे उच्च पदों पर पहुंच गए और अच्छी आय व सामाजिक रुतबा हासिल कर चुके हैं, तो क्या उनके बच्चों को भी उसी तरह आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए? असली मकसद: कोर्ट का मानना है कि आरक्षण का मुख्य उद्देश्य सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वंचितों को ऊपर उठाना है। अगर संपन्न और उच्च अधिकारी वर्ग के बच्चे भी आरक्षण का लाभ लेते रहेंगे, तो वास्तविक जरूरतमंदों तक इसका फायदा कभी नहीं पहुंच पाएगा। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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