
Theft of Donation Money कांग्रेसी दिग्गज दिग्विजय सिंह ने दान वापस मांगने की कही बात
समाजवादी पार्टी भी चंदाचोरी को बना सकती है यूपी में चुनावी मुद्दा
नया लुक ब्यूरो
अयोध्या। राम। हे राम। सीताराम। मर्यादा पुरुषोत्तम राम। लेकिन अब राम भी विवादों में हैं। उनके नाम की मर्यादा अब धूमिल हो रहीं है। भारत की पार्टियां अब उनके नाम पर राजनीति को तूल देने पर आमादा हैं। कभी रामजन्मभूमि के नाम देश भर के हिंदुओं को लामबंद कर चुकी भारतीय जनता पार्टी अब उसी राम मंदिर में हुए चंदा चोरी के मुद्दे पर घिरती नज़र आ रहीं है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के कथित मामले में अब एक नया विवाद सामने आया है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि मंदिर परिसर में कराए गए कार्यों के भुगतान में कथित तौर पर कमीशनखोरी का खेल भी चलता था। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की ओर से इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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आरोप लगाने वालों का दावा है कि काम कराने वाले ठेकेदारों और संबंधित लोगों से भुगतान के बाद कथित रूप से रकम वापस ली जाती थी। आरोप यह भी है कि ऐसा नहीं करने वालों पर मानसिक दबाव बनाया जाता था और उन्हें काम में परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कुछ आरोपों में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम भी लिया गया है। साथ ही कुछ ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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SIT को मिले कई आपत्तिजनक बिंदु
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में आई SIT की रिपोर्ट में कई तरह के चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस अब तक आठ आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और उन्हें गिरफ्तार कर चुकी है। इनकी गिरफ्तारी के बाद राम मंदिर तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्र अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि SIT की जांच में आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट का भी परीक्षण किया है, जिसमें पता चला है कि वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में कई प्रक्रियात्मक कमियां पाई गई हैं, इसमें हुंडियों की संख्या और अभिलेखों में अंतर देखने को मिला है।
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अपना दान वापस माँग रहे दिग्गज कांग्रेसी नेता
इन आरोपों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने दावा किया है कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए एक लाख रुपये का दान दिया था। उनका कहना है कि कथित अनियमितताओं के मद्देनजर वह अपना दान वापस चाहते हैं और इसके लिए अयोध्या में कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। हालांकि राम मंदिर चढ़ावा चोरी के कथित मामले में जांच जारी है। अब यह देखना होगा कि जांच एजेंसियां इन नए आरोपों की भी जांच करती हैं या नहीं।
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सपा बनाना चाह रही है साल 2027 में चुनावी मुद्दा
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकता है। सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे को चुनावी रणनीति का हिस्सा बना सकती है। साथ ही अयोध्या के धार्मिक विकास और मंदिर प्रबंधन से जुड़े सवालों को भी अपने एजेंडे में शामिल करने की तैयारी बताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
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One thought on “राम मंदिर चढ़ावा मामला: अब कमीशनखोरी के आरोप”
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