- डॉलर के मुकाबले 95.34 पर पहुंची भारतीय मुद्रा
- विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव रोकने को तैयार RBI
नया लुक ब्यूरो
नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले लगातार लुढ़क रही भारतीय मुद्रा (रुपये) को मजबूत करने का जिम्मा स्वयं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने संभाला है। उन्होंने विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सधा कदम उठाने की घोषणा की है। जिसका असर बाजार में भी देखने को मिला है। बताते चलें कि डॉलर की बढ़ती मांग, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महंगे कच्चे तेल की वजह से रुपया 90 प्रति डॉलर के पार पहुंच गया है। उनके बयान के बाद सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती देखने को मिली। भारतीय मुद्रा 0.4 फीसदी मजबूत होकर 95.34 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गई। बकौल संजय मल्होत्रा, केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद रुपये में करीब छह प्रतिशत की गिरावट आई है।
एक इंटरव्यू में मल्होत्रा ने कहा कि मौजूदा समय में रुपया अपनी वास्तविक कीमत से नीचे यानी ‘अंडरवैल्यूड’ दिखाई दे रहा है। RBI के मुताबिक, केवल नाम मात्र आधार पर ही नहीं बल्कि REER (रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट) के हिसाब से भी रुपये में कमजोरी दिखाई दे रही है। संजय मल्होत्रा का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो भारतीय मुद्रा में और मजबूती आ सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कमजोरी अस्थायी हो सकती है और वैश्विक हालात सुधरने पर रुपये में सुधार देखने को मिलेगा। उन्होंने साफ कहा कि बाजार की ताकतें ही तय करती हैं कि रुपये की सही कीमत क्या होनी चाहिए।
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RBI गवर्नर ने साफ किया कि केंद्रीय बैंक किसी खास डॉलर-रुपया स्तर को बनाए रखने की कोशिश नहीं कर रहा है। हालांकि, अगर बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी या असामान्य दबाव बनता है तो RBI हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित स्थिति बनाए रखना केंद्रीय बैंक की प्राथमिकता है।
700 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार
RBI गवर्नर ने भरोसा दिलाया कि भारत के पास करीब 700 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल बाजार को स्थिर रखने के लिए किया जा सकता है। RBI गवर्नर ने कहा कि भारत को चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को नियंत्रित करने के लिए लगातार काम करना होगा। साथ ही पूंजी खाते (Capital Account) को और मजबूत बनाने की जरूरत है। वहीं संजय मल्होत्रा ने दोहराया कि महंगाई को नियंत्रण में रखना RBI की सबसे अहम जिम्मेदारी है। हालांकि, यदि महंगाई का दबाव कम होता है तो केंद्रीय बैंक आर्थिक विकास को गति देने के लिए नीतिगत कदम उठा सकता है।
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रुपये को संभालने के लिए RBI के बड़े कदम
पिछले कुछ महीनों में Reserve Bank of India ने रुपये को स्थिर रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप, ऑफशोर ट्रेडिंग पर अस्थायी सख्ती और डॉलर-रुपया स्वैप ऑपरेशन शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI अब ब्याज दरों में बदलाव, अतिरिक्त डॉलर जुटाने और नए करेंसी स्वैप जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।
तेल कीमतों में गिरावट से भारत को राहत
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है। इससे महंगाई कम करने, चालू खाते के घाटे को नियंत्रित रखने और रुपये को स्थिर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
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2 thoughts on “RBI गवर्नर के बयान से मजबूत हुआ रुपया”
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