NEET रद्द परीक्षा ने देश भर में मचाया कोहराम, मर रहे नौनिहाल

NEET

डॉक्टर बनने का सपना हुआ जानलेवा

देश की सबसे कठिन परीक्षा के लीक होने से सदमें में करोड़ों छात्र

नया लुक डेस्क

NEET Exam के चलते महाराष्ट्र के लातूर जिले से एक दुखद खबर सामने आई है। डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली एक छात्रा ने मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि छात्रा NEET की तैयारी कर रही थी और परीक्षा रद्द होने के बाद काफी परेशान थी। इस घटना ने एक बार फिर छात्रों पर बढ़ते परीक्षा दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मैथिली पहली लड़की नहीं है जिसने आत्महत्या की है, उसके अलावा दर्जनों छात्र-छात्राओं ने मौत को गले लगा लिया है।

मामला महाराष्ट्र के लातूर तालुका के गोंडेगांव गांव का है। पुलिसिया बयान में छात्रा के पिता अशोक विट्ठल सोनवणे ने बताया कि मैथिली ने इस साल 12वीं की परीक्षा 51.50 प्रतिशत अंकों के साथ पास की थी। वह डॉक्टर बनना चाहती थी। इसी सपने को पूरा करने के लिए NEET  की तैयारी कर रही थी। मैथिली ने CET परीक्षा भी दी थी। NEET परीक्षा से जुड़े पेपर लीक विवाद और परीक्षा रदद् होने की खबर के बाद वह लगातार तनाव में रहने लगी थी। छात्रा के पिता अशोक सोनवणे ने पुलिस को बताया कि उन्हें किसी पर कोई शक नहीं है और न ही किसी के खिलाफ कोई शिकायत है। उनका कहना है कि उनकी बेटी लम्बे समय से मानसिक तनाव में थी और परीक्षा रद्द होने के बाद ज्यादा परेशान रहने लगी थी।

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परिवार ने खेत में देखा दर्दनाक मंजर

पिता के अनुसार 16 मई की सुबह करीब साढ़े आठ बजे मैथिली घर में नहीं मिली। इसके बाद परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की। कुछ देर बाद वह खेत में एक नीम के पेड़ से लटकी हुई मिली। उसने आत्महत्या के लिए दुपट्टे का इस्तेमाल किया था। परिजन तुरंत उसे मुरुड के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बाद में गांव में अंतिम संस्कार किया गया।

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छात्रों पर बढ़ता परीक्षा दबाव चिंता का विषय

देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। खासकर NEET और JEE जैसी परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं। ऐसे में परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितता, पेपर लीक या परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाएं छात्रों को मानसिक रूप से कमजोर कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार और स्कूलों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। केवल पढ़ाई और रिजल्ट ही जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए।

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मानसिक स्वास्थ्य को समझना जरूरी

मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. विजित जायसवाल कहते हैं कि छात्रों को यह समझाने की जरूरत है कि असफलता या परीक्षा में परेशानी जीवन का अंत नहीं है, बल्कि हर समस्या का समाधान संभव है। अगर कोई छात्र लगातार तनाव, डर या निराशा महसूस कर रहा हो, तो उसे अकेला न छोड़ें। परिवार और दोस्तों का सहयोग कई बार किसी की जिंदगी बचा सकता है। बड़ी परीक्षा है तो परिणाम के लिए मेहनत करें। तनाव में आकर जिंदगी खोने से अच्छा है एक बार फिर से तैयारी कर ली जाए।


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