
ब्राह्मण से लेकर दलित और आदिवासी तक को मिली शुवेंदु काबीना में जगह
एक महिला भी मंत्रिमंडल की सूची में शामिल, फायर ब्रांड नेता हैं अंगमित्रा पॉल
अंशिका यादव
West Bengal : यूं तो कुल पांच लोगों ने ही शुभेंदु अधिकारी के साथ शपथ ली है। लेकिन इन पांच लोगों में ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सामाजिक संतुलन साधने की पूरी कोशिश की। शुवेंदु की इस टीम में ब्राह्मण, मतुआ, महिला और आदिवासी सभी लोग शामिल हुए। मंच पर मोदी का जनता अभिवादन भी इस बीच चर्चा का विषय बना रहा है। बताते चलें कि पीएम मोदी शुरू से ही जनता को सर्वोच्च मानते हैं, इसीलिए भरे मंच से मोदी ने जनता जनार्दन को दंडवत प्रणाम किया। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
शुभेंदु ने भी मंत्री पद की शपथ ली। नई सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश साफ नजर आई। नई कैबिनेट में दिलीप घोष को मंत्री बनाया गया है। बंगाल बीजेपी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष खड़गपुर सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने वाले घोष को सरकार में अहम जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अंगमित्रा पॉल ने भी मंत्री पद की शपथ ली। बीजेपी की मजबूत महिला चेहरा मानी जाने वाली अग्निमित्रा पॉल लगातार दूसरी बार विधायक बनी हैं। पार्टी ने उन्हें महिलाओं और युवा वर्ग के प्रतिनिधित्व के तौर पर आगे बढ़ाया है।
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अशोक किरटानिया को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। बनगांव उत्तर से विधायक अशोक कीर्तनिया मतुआ समुदाय के बीच मजबूत पकड़ रखते हैं। माना जा रहा है कि उनके जरिए बीजेपी ने मतुआ वोट बैंक को मजबूत संदेश देने की कोशिश की है। इसके अलावा खुदीराम टुडु ने मंत्री पद की शपथ ली। रानीबांध से पहली बार विधायक बने खुदीराम टुडू आदिवासी समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। निशीथ प्रमाणिक भी नई सरकार का हिस्सा बने हैं। पहले सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुके निशीथ प्रमाणिक अब विधानसभा चुनाव जीतकर राज्य सरकार में मंत्री बने हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी सरकार की नई टीम में ब्राह्मण, महिला, मतुआ और आदिवासी समाज के नेताओं को शामिल कर बीजेपी ने मजबूत ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का संदेश देने की कोशिश की है।
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गौरलतब है कि पिछले 15 बरसों तक पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का शासन था। 34 साल पुराने कम्युनिस्टों के लाल गढ़ को नेस्तनाबूद करने वाली ममता बनर्जी की टीम इस बार भगवा टोली के सामने पिछड़ गई और सूबे में भाजपा की सरकार बन गई। बंगाल के अधिकांश लोगों का आरोप ममता पर लगता रहा कि बनर्जी अपने गुंडों के दम पर सूबे की सत्ता चला रही थीं।
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2 thoughts on “माया की तर्ज पर बंगाल में सोशल इंजीनियरिंग की राह पर BJP”
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