AAP breaking news today : केजरीवाल की पार्टी में दरार गहरी: AAP में बगावत और नेताओं का पलायन
AAP breaking news today : नई दिल्ली की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (AAP) अब अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। हाल ही में राघव चड्ढा का सात राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल होना सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे मतभेदों का विस्फोट है। यह घटनाक्रम अचानक जरूर लगा, लेकिन इसकी जड़ें काफी गहरी हैं। दरअसल, यह कहानी सत्ता संघर्ष, विश्वास की कमी और नेतृत्व पर उठते सवालों से जुड़ी हुई है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
AAP के अंदर दरार की शुरुआत 2024 में उस समय हुई जब स्वाति मालीवाल ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 13 मई को मुख्यमंत्री आवास पर उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। इस घटना ने न केवल राजनीतिक हलकों में सनसनी फैलाई, बल्कि पार्टी के भीतर भी असहजता पैदा कर दी। इस विवाद ने AAP के नेताओं के बीच विश्वास की नींव को हिला दिया। वरिष्ठ नेताओं के बीच खामोशी और असहमति साफ नजर आने लगी, जिसने धीरे-धीरे एक बड़े संकट का रूप ले लिया।
ये भी पढ़े
बढ़ती खाई और अंदरूनी असंतोष
मालीवाल मामले के बाद पार्टी में असंतोष लगातार बढ़ता गया। इसी बीच, राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता पद से हटाने का फैसला लिया गया, जिसने इस संकट को और गहरा कर दिया। हालांकि कई सांसदों ने खुलकर विरोध नहीं जताया, लेकिन अंदरखाने नाराजगी बढ़ती रही। आखिरकार यह असंतोष तब सामने आया जब चड्ढा समेत सात सांसदों ने पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया।
राघव चड्ढा का बड़ा ऐलान
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने अपने और अन्य सांसदों के इस्तीफे की पुष्टि की। यह AAP के लिए बड़ा झटका था, खासकर तब जब कई राज्यों में चुनाव नजदीक हैं। इस बीच AAP नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला बीजेपी के “ऑपरेशन लोटस” का हिस्सा है। उनका दावा था कि केंद्रीय एजेंसियों के दबाव के कारण सांसदों ने पार्टी छोड़ी।
AAP में राघव चड्ढा का सफर
राघव चड्ढा कभी केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद बनने के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा। भगवंत मान के बाद उन्हें पंजाब में सबसे प्रभावशाली नेताओं में माना जाता था।लेकिन 2024 में आबकारी नीति मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद हालात बदल गए। पार्टी के भीतर चड्ढा की भूमिका पर सवाल उठने लगे। उनकी गैर-मौजूदगी और चुप्पी को लेकर आलोचना बढ़ी, जिसके चलते उन्हें धीरे-धीरे अहम जिम्मेदारियों से हटा दिया गया।
ये भी पढ़े
A Horrific Incident : आंख पर बांधी पट्टी और Love का ढोंग करते करते जिंदा फूंका
पद से हटाना बना टर्निंग पॉइंट
चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता पद से हटाना इस पूरे घटनाक्रम का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उन्होंने उस समय संकेत दिया था कि सही समय आने पर जवाब देंगे। उनकी यह चेतावनी तब सच साबित हुई जब उन्होंने एक साथ कई सांसदों के साथ पार्टी छोड़ दी। यह कदम AAP के लिए राजनीतिक रूप से बड़ा झटका है।
स्वाति मालीवाल का बड़ा बयान
अपने विस्तृत बयान में स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़ने के पीछे कई गंभीर कारण बताए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं हो रही हैं। उनके अनुसार, नेतृत्व स्तर पर गलत तत्वों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पार्टी की मूल विचारधारा कमजोर हो रही है।
AAP के भविष्य पर सवाल
AAP में यह टूट ऐसे समय में आई है जब पंजाब, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में चुनाव नजदीक हैं। पार्टी के अंदर बढ़ती कलह ने उसके राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अरविंद केजरीवाल इस संकट से पार्टी को उबार पाएंगे, या यह बिखराव AAP के लिए एक लंबे राजनीतिक पतन की शुरुआत है?
नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
खबरों में अपडेट रहना हमारी आदत है और सबसे आगे रहना मेरा जुनून। अब नया लुक ऐप भी ले आया है। आप सभी से अनुरोध है कि आप इसे अपना प्यार, दुलार और आशीर्वाद दें। आप सभी से निवेदन है कि मेरा न्यूज ऐप अपने अपने फोन में इंस्टॉल कर लीजिए। मैं आप सभी का आभारी रहूंगा…. https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews
ये भी पढ़े
A Horrific Incident : आंख पर बांधी पट्टी और Love का ढोंग करते करते जिंदा फूंका
