
NDA summit 2026 : नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA ) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। इस बैठक में एनडीए के सभी प्रमुख घटक दलों के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे और देश की राजनीतिक दिशा, विकास कार्यों और आगामी रणनीतियों पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान का एक खास पल सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया, जब पीएम मोदी ने नेताओं को पारंपरिक बंगाली स्ट्रीट फूड झालमुरी परोसा और खुद भी इसका आनंद लिया। इस अनौपचारिक और हल्के-फुल्के माहौल ने बैठक को और भी खास बना दिया। इस दौरान पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी समेत कई नेताओं ने भी PM मोदी के साथ बैठकर झालमुरी का स्वाद लिया। पीएम मोदी का यह अंदाज पहले भी लोगों का ध्यान आकर्षित करता रहा है, जब उन्होंने पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान भी स्थानीय स्ट्रीट फूड का अनुभव लिया था।
नेहरू का रिकॉर्ड तोड़कर ऐतिहासिक उपलब्धि
इसी बैठक के दौरान एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक तथ्य चर्चा में रहा। पीएम मोदी ने लगातार सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के लंबे कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी ने कुल 4,399 दिनों तक लगातार प्रधानमंत्री पद पर कार्य किया है, जबकि नेहरू का रिकॉर्ड 4,398 दिनों का था। यह उपलब्धि भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। एनडीए नेताओं ने इस अवसर पर पीएम मोदी का सम्मान किया और उन्हें शुभकामनाएं एवं उपहार भी प्रदान किए। पूरे कार्यक्रम में उत्साह और सम्मान का माहौल देखने को मिला।
झालमुरी बना चर्चा का केंद्र
इस पूरी बैठक में सबसे अधिक चर्चा जिस बात की हुई, वह थी पीएम मोदी द्वारा नेताओं को झालमुरी खिलाना। झालमुरी पश्चिम बंगाल का एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है, जो अपने तीखे और चटपटे स्वाद के लिए जाना जाता है। “झाल” का अर्थ बंगाली भाषा में तीखा होता है और “मुरी” का मतलब मुरमुरा होता है। इसे मुरमुरा, सरसों का तेल, प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, आलू, मूंगफली, भुजिया, नींबू रस और कई मसालों के साथ तैयार किया जाता है। कोलकाता और पश्चिम बंगाल में यह स्नैक बेहद लोकप्रिय है, लेकिन अब यह पूरे देश में पहचाना जाने लगा है। राजनीतिक दृष्टि से भी यह चर्चा में आ गया है क्योंकि पीएम मोदी के इससे जुड़ाव को उनके चुनावी दौरों और जनसंपर्क शैली से जोड़कर देखा जाता है।

