पश्चिम एशिया संकटः नागरिकों की सुरक्षा-निकासी में केंद्रीय भूमिका निभा रहे भारतीय मिशन

शाश्वत तिवारी

नई दिल्ली। ईरान-इजरायल संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के बीच, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और निकासी में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय दूतावास ने ‘ऑपरेशन सिंधु’ और अन्य निकासी प्रयासों के तहत हजारों भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने और उड़ानों की कमी के कारण, दूतावास ने आर्मेनिया और अजरबैजान के साथ समन्वय करके जमीनी रास्तों से निकासी की व्यवस्था की है। संघर्ष शुरू होने के बाद हाल ही में करीब 22,00 से अधिक भारतीय नागरिकों को इन रास्तों से निकाला गया है, जिनमें मुख्य रूप से लगभग 1000 छात्र और 650 से अधिक मछुआरे शामिल हैं। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 11 अप्रैल को बताया कि 312 और भारतीय मछुआरों को ईरान से सुरक्षित निकाला गया है।

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उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा 312 और भारतीय मछुआरों को आर्मेनिया के रास्ते ईरान से सुरक्षित भारत लाया गया। इसे मुमकिन बनाने के लिए आर्मेनिया सरकार और मेरे दोस्त अरारत मिर्जोयान का शुक्रिया। इसके अलावा डॉ. जयशंकर ने अपने यूएई दौरे के दौरान राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद से मिलकर क्षेत्र में व्याप्त संघर्ष के दौरान भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए उनके प्रति अपना आभार व्यक्त किया। इससे पहले 5 अप्रैल को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच ईरान में फंसे 345 भारतीय मछुआरों को आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित चेन्नई लाया गया था। भारतीय विदेश मंत्रालय और तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने हवाई मार्ग बंद होने के बावजूद मुसीबत में फंसे भारतीयों की मदद के लिए हर संभव प्रयास शुरू किए और अब अलग-अलग जत्थों और चरणों में भारतीयों की वतन वापसी जारी है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में आर्मेनिया के रास्ते निकाले गए लोगों में अधिकतर तमिलनाडु के कन्याकुमारी, तूत्तुकुडी, तिरुनेलवेली और नागपट्टिनम जिलों के रहने वाले मछुआरे शामिल हैं। अपने घर पहुंचने के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए मछुआरों ने युद्ध के हालात के बीच ईरान से अपने गांव लौटना ‘दूसरी जिंदगी’ मिलने जैसा बताया है। उन्होंने अपनी सुरक्षित वापसी के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशनों के प्रति आभार भी जताया है। बता दें कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के साथ ही क्षेत्र में मौजूद विभिन्न भारतीय मिशन तुरंत अलर्ट हो गए थे। मिशनों की ओर से भारतीय नागरिकों के हितों में निरंतर एडवाइजरी जारी की जा रही है। नागरिकों से कहा गया है कि वे दूतावास के साथ समन्वय बनाए रखें और किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर जाने से पहले सलाह अवश्य लें। युद्धविराम की कोशिशों और शांति वार्ता के बावजूद क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, इसलिए भारत सरकार प्राथमिकता के आधार पर बाकी बचे लोगों को भी निकालने में जुटी है।

 

 

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