भारतीय विमानन क्षेत्र में परिचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। रेगुलेटर ने लंबी दूरी की उड़ानों के लिए पायलटों की फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) में अस्थायी ढील देने की घोषणा की है। इस फैसले का उद्देश्य एयरलाइन कंपनियों को मौजूदा संचालन संबंधी चुनौतियों से राहत देना और पायलटों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
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दरअसल, पिछले वर्ष DGCA ने पायलटों की थकान को ध्यान में रखते हुए सख्त नियम लागू किए थे। इन नियमों के तहत पायलटों के कार्य घंटों को सीमित किया गया और अनिवार्य विश्राम अवधि को 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया गया। यह कदम सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के लिए उठाया गया था, लेकिन इससे एयरलाइंस को क्रू मैनेजमेंट में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से, इन नए नियमों का प्रभाव दिसंबर 2025 में साफ तौर पर देखने को मिला, जब इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइन को पायलटों की कमी के कारण कई उड़ानों को रद्द करना पड़ा। इस स्थिति ने यह संकेत दिया कि उद्योग को नियमों के अनुपालन और संचालन के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है।
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इसी पृष्ठभूमि में DGCA ने अस्थायी राहत प्रदान की है। नए प्रावधानों के अनुसार, फ्लाइट टाइम (FT) को बढ़ाकर 11 घंटे 30 मिनट कर दिया गया है, जबकि फ्लाइट ड्यूटी पीरियड (FDP) को 11 घंटे 45 मिनट तक बढ़ाया गया है। यह बदलाव विशेष रूप से उन लंबी दूरी की उड़ानों के लिए लागू होगा, जो दो पायलटों द्वारा संचालित होती हैं। हालांकि, यह छूट अस्थायी है और इसे एक निश्चित अवधि तक ही लागू किया गया है। इस दौरान DGCA स्थिति की निगरानी करेगा और जरूरत पड़ने पर आगे के निर्णय लेगा।यह कदम एयरलाइंस के लिए राहत भरा है, लेकिन इसके साथ ही सुरक्षा और पायलटों के स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा
