सागवान वाला पलंग टूटे या न, लेकिन थानेदार महोदया ने…

  • महिलाओं के साथ खेसारी के गाने पर ऐसी थिरकी कि सोशल मीडिया का रिकॉर्ड टूटा

नई दिल्ली। एक समय था जब अलीशा चिनॉय की आवाज युवाओं की धड़कनों पर राज करती थी। 80-90 के दशक में “भारत में किए गए” और ज़ूबी ज़ूबी जैसे गानों ने उन्हें पॉप म्यूजिक की पहचान बना दिया था। उनकी आवाज की खनक आज भी सुनते ही पुरानी यादों को ताजा कर देती है। अब जरा इस वायरल वीडियो की बात। इसमें भोजपुरी स्टारखेसारी लाल यादव के गाने “टूट जाई राजा जी पलंग सागवान पर” पर कुछ महिलाएं झूमती नजर आ रही हैं। उनके बीच वर्दी में थिरकती दिखीं धनबाद के राजगंज थाने की प्रभारी अलीशा कुमारी। बताया गया कि चैती दुर्गा पूजा के मौके पर महिलाओं के आग्रह पर वह खुद को रोक नहीं पाईं और माहौल में शामिल हो गईं।

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लेकिन जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, मामला बदल गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने संज्ञान लिया और एसएसपी ने उन्हें लाइन हाजिर कर दिया। अब सवाल यही उठता है। क्या वर्दी पहनते ही इंसान अपनी भावनाएं दरवाजे पर छोड़ देता है? अनुशासन और गरिमा अपनी जगह बेहद जरूरी हैं, लेकिन क्या हर स्थिति में मानवीय पक्ष को नजरअंदाज कर देना सही है?पुलिस की नौकरी आसान नहीं होती। लंबे समय तक तनाव, जिम्मेदारियां, ड्यूटी का दबाव—इन सबके बीच अगर किसी त्योहार या खुशी के मौके पर कोई अधिकारी कुछ पल खुलकर जी ले, तो क्या उसे सजा के नजरिए से देखना उचित है? बात सिर्फ एक वीडियो की नहीं, बल्कि उस सोच की है जहां हर चूक पर कार्रवाई ही पहला विकल्प बन जाती है। अनुशासन जरूरी है, लेकिन संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है। अंत में यही कहा जा सकता है, सागवान वाला पलंग टूटे या न टूटे, लेकिन इस कार्रवाई ने कई लोगों के दिल जरूर तोड़ दिए।

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