झारखंड में 500 करोड़ से अधिक का ट्रेज़री घोटाला

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  • रिटायर्ड मृत और स्थानांतरित पुलिसकर्मियों के नाम फर्जी pay id से निकाल लिए करोड़ों रुपए,
  • खरीदी कीमती जमीनें, लग्जरी गाड़ियां और अपार्टमेंट
  • घोटाले से राज्य के करीब तीन लाख कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर संकट
  • विपक्षी भाजपा का बयान “जांच सही तरीके से आगे बढ़ी तो यह चारा घोटाले से बड़ा घोटाला”

रंजन कुमार सिंह

रांची। ट्रेजरी घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे हो रहे हैं। अब तक इस मामले में चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। ताज़ा कार्रवाई में 30 अप्रैल को एक और आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जबकि 29 अप्रैल को भी एक गिरफ्तारी हुई थी। इससे पहले दो अन्य पुलिसकर्मी न्यायिक हिरासत में हैं। जांच में सामने आया है कि पुलिस विभाग के लेखपाल कौशल कुमार पांडे (बोकारो) ने एक सेवानिवृत्त हवलदार को फर्जी तरीके से दरोगा बनाकर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी करवाई। 7 अप्रैल को उसकी गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच तेज कर दी गई।
इस घोटाले के तार हजारीबाग से भी जुड़े हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस फर्जीवाड़े की नींव वहीं रखी गई थी। हजारीबाग से भी तीन पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

मामले की जांच फिलहाल Criminal Investigation Department (CID) कर रही है। 27 अप्रैल को गृहरक्षक जवान सतीश कुमार सिंह, 29 अप्रैल को अशोक भंडारी और 30 अप्रैल को काजल मंडल को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपी मुख्य आरोपी के सहयोगी बताए जा रहे हैं। CID जांच में यह भी सामने आया है कि घोटाले का दायरा सात जिलों तक फैला हुआ है। इनमें बोकारो, हजारीबाग, रांची, जमशेदपुर, देवघर, रामगढ़ और पलामू शामिल हैं। जांच में मृत एवं सेवानिवृत्त कर्मियों के नाम पर वेतन निकासी और डेटा में हेरफेर की बात सामने आई है। घोटाले के कारण राज्य के करीब तीन लाख कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर भी असर पड़ा है। झारखंड सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल के नेतृत्व में शुरू कराई है। जांच टीम पिछले सात वर्षों के दस्तावेजों की छानबीन कर रही है।

इधर, विपक्ष ने मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो यह मामला Fodder Scam जैसा बड़ा घोटाला साबित हो सकता है। झारखंड में ट्रेजरी (कोषागार) घोटाला, इसे जे-कुबेर (J-Kuber) पोर्टल घोटाला या सैलरी स्कैम के रूप में भी जाना जा रहा है, 2026 के अप्रैल में सामने आया एक बड़ा वित्तीय फर्जीवाड़ा है। यह मामला लगभग चारा घोटाले की तर्ज पर डिजिटल तरीके से सरकारी धन की अवैध निकासी से जुड़ा है, जिसमें पुलिस और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने मिलकर करोड़ों रुपये डकारे हैं।यह घोटाला पूरी तरह से “इनसाइडर जॉब” (अंदरूनी मिलीभगत) है। अधिकारियों ने वेतन भुगतान के लिए इस्तेमाल होने वाले जे-कुबेर पोर्टल का दुरुपयोग किया। रिटायर्ड या तबादला हो चुके पुलिसकर्मियों के नाम पर फर्जी पे-आईडी (Pay ID) बनाकर वेतन निकाला गया।

डीएसपी से लेकर सिपाही स्तर के अधिकारियों ने अपने खातों में या रिश्तेदारों के खातों में अवैध रूप से सरकारी धन ट्रांसफर किया। इस पैसे से रांची, गया और हजारीबाग में जमीन और लग्जरी गाड़ियां (जैसे इनोवा, थार, स्कॉर्पियो) खरीदी गईं।
यह घोटाला लगभग 5-6 वर्षों से चल रहा था, हालांकि कुछ रिपोर्टों के अनुसार यह 2017 से 2026 के बीच और कुछ मामलों में 2011 से चल रहा था। सबसे ज्यादा मामले हजारीबाग, बोकारो, और रांची की ट्रेजरी से सामने आए हैं। इन्हें हॉट स्पॉट जिला माना जा रहा है। महालेखाकार की रिपोर्ट के बाद राज्य के 14 ट्रेजरी की जांच की जा रही है। शुरू में मामला 27-30 करोड़ का लग रहा था, लेकिन जांच जैसे-जैसे बढ़ रही है, घोटाला 150 करोड़ से 500 करोड़ रुपये तक होने का अनुमान है।बोकारो में ही अकेले 16 करोड़ से ज्यादा की अवैध निकासी का पता चला है।

विपक्षी भाजपा ने इसे 10,000 करोड़ रुपये तक का घोटाला बताया है। इस घोटाले में 200 से अधिक पुलिसकर्मियों (सिपाही से लेकर डीएसपी स्तर) की भूमिका संदिग्ध है और वे जांच के दायरे में हैं। हजारीबाग, बोकारो और चाईबासा से कई अकाउंटेंट और पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के अलावा, रांची में पशुपालन विभाग के कर्मचारियों ने भी 3 करोड़ से अधिक का गबन किया है। झारखंड सरकार ने 2000 से 2026 तक की जांच के आदेश दिए हैं।


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