
राजेन्द्र गुप्ता
हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भोलेनाथ की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती हैं और जीवन में सफलताएं मिलती हैं। मासिक शिवरात्रि के अवसर पर भक्त जलाभिषेक करते हैं और व्रत रखते हैं। वैशाख महीने की मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है।
कब रखा जाएगा मासिक शिवरात्रि का व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 अप्रैल 2026 को रात में 10 बजकर 31 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन 16 अप्रैल को शाम 8 बजकर 11 मिनट पर होगा। ऐसे में निशिता काल को देखते हुए मासिक शिवरात्रि का व्रत 15 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा।
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क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त?
मासिक शिवरात्रि की पूजा निशिता मुहूर्त में करना बेहद फलदायी माना जाता है। पंचांग के अनुसार 15 अप्रैल को शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 15 मिनट से देर रात 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। आप इस अवधि में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकते हैं।
मासिक शिवरात्रि पर करें इस मंत्र का जाप
- ॐ नमः शिवाय
- नमो नीलकण्ठाय
- ॐ पार्वतीपतये नमः
- मासिक शिवरात्रि का महत्व
मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की पूजा करने और आंतरिक शांति के लिए उनका शाश्वत आशीर्वाद प्राप्त करने का आदर्श दिन माना जाता है। मास शिवरात्रि या मिनी शिवरात्रि के नाम से भी जानी जाने वाली यह तिथि भगवान शिव और देवी शक्ति के मिलन का प्रतीक है। भगवान शिव की पूजा करने और उनका कृपा आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यह एक आदर्श दिन है। मासिक शिवरात्रि प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की 14वीं (घटते चंद्रमा की) चतुर्दशी को मनाई जाती है। यदि यह मंगलवार को पड़ती है, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन विवाहित और अविवाहित दोनों महिलाएं व्रत रखती हैं और भगवान की प्रार्थना करती हैं। विवाहित महिलाएं अपने पतियों के अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए व्रत रखती हैं। अविवाहित महिलाएं जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए भगवान शिव की पूजा करती हैं।
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मासिक शिवरात्रि के अनुष्ठान
मासिक शिवरात्रि पर पालन की जाने वाली पारंपरिक रस्म दिनभर उपवास रखना है। कुछ भक्त शिव पूजा के बाद अगली सुबह उपवास तोड़ते हैं। लोग पास के शिव मंदिरों में जाते हैं या घर पर शिव पूजा करते हैं। भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग की पूजा पवित्र जल, दूध, दही, घी, शहद, हल्दी पाउडर, विभूति (पवित्र राख) और गुलाब जल से अभिषेक करके की जाती है। “ ॐ नमः शिवाय ” का जाप भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने का अचूक तरीका है।
मासिक शिवरात्रि व्रत करने के लाभ
- भगवान शिव का अनंत आशीर्वाद
- शत्रुओं पर विजय प्राप्त करो और मृत्यु के भय से बचो
- रोगों से मुक्ति पारिवारिक कल्याण और करियर विकास
- ज्ञान, आंतरिक शांति और मोक्ष का मार्ग
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One thought on “Masik Shivratri 2026 : आज रात महादेव की पूजा का सबसे श्रेष्ठ समय, भूलकर भी न करें ये गलतियां!”
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