नया लुक डेस्क
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को चौंकाते हुए बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि वह ईरान पर छह अप्रैल तक कोई हमला नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच बातचीत के प्रयास जारी हैं। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने सद्भावना के तौर पर एक “कीमती तोहफा” दिया है। दावा किया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से 10 तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी गई है, जिनमें से 8 रवाना हो चुके हैं। इन टैंकरों पर पाकिस्तानी झंडे लगे होने की बात भी सामने आई है।
बातचीत और आरोपों के बीच बढ़ता तनाव
एक ओर जहां अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर बातचीत की अटकलें तेज हैं, वहीं आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिकी सैनिक खाड़ी क्षेत्र में अपने ठिकानों को छोड़कर छिप रहे हैं और नागरिकों को ‘ह्यूमन शील्ड’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इजरायल डिफेंस फोर्स ने दावा किया है कि उसने तेहरान में बड़े पैमाने पर हमले कर ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं सऊदी अरब ने अपने पूर्वी हिस्से में दो ड्रोन मार गिराने की पुष्टि की है, जहां तेल प्रतिष्ठान स्थित हैं। इसके साथ ही इजरायल ने लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है और हिज्बुल्ला के खिलाफ अभियान तेज करने की बात कही है।
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बातचीत की राह अब भी मुश्किल
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन ईरान ने हर्जाना, सुरक्षा गारंटी और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण जैसी शर्तें रखी हैं। अमेरिका इन शर्तों को मानने के पक्ष में नहीं दिख रहा, जिससे समझौते की राह फिलहाल कठिन नजर आ रही है। भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की जरूरत पर जोर दिया है। वहीं व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी दी है कि खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के परिणाम पूरी दुनिया के लिए अप्रत्याशित हो सकते हैं। उन्होंने इसे कोविड जैसी वैश्विक आपदा से तुलना करते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन और उद्योगों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
6 अप्रैल तक रुकी कार्रवाई
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के अनुरोध पर ऊर्जा ठिकानों पर हमले की कार्रवाई 6 अप्रैल 2026 तक स्थगित कर दी गई है। उन्होंने दावा किया कि बातचीत “अच्छी दिशा” में आगे बढ़ रही है, लेकिन हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। मध्य-पूर्व में जारी यह टकराव न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
