हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। बाजार के लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा टूटकर 81,620 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी करीब 200 अंक गिरकर 25,272 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट से निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और अब तक करीब 3 लाख करोड़ रुपये की पूंजी बाजार से साफ हो चुकी है।
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मिड और स्मॉल कैप शेयरों में भी दबाव
कारोबार के दौरान बीएसई पर मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी करीब 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। पूरे सप्ताह बाजार पर बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
गिरावट की बड़ी वजहें : भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और परमाणु वार्ता में अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों का मूड कमजोर किया है। निवेशकों में आगे की स्थिति को लेकर संशय बना हुआ है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: ब्रेंट क्रूड की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से महंगाई और सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ी है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ा।
विदेशी निवेशकों की रणनीति: विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भले ही फरवरी में खरीदारी करते दिखे हों, लेकिन लगातार प्रॉफिट बुकिंग से बाजार में दबाव बना हुआ है।
सेक्टोरल प्रॉफिट बुकिंग: बैंकिंग, ऑटो, मेटल और FMCG सेक्टर में हालिया तेजी के बाद भारी मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे बाजार की गिरावट और तेज हो गई।
फ्लैट ओपनिंग के बाद बढ़ी गिरावट : शुक्रवार को बाजार ने मामूली कमजोरी के साथ शुरुआत की थी। सेंसेक्स 82,220 के आसपास और निफ्टी 25,459 के स्तर पर खुला, लेकिन दिन बढ़ने के साथ बिकवाली हावी हो गई और बाजार गहरे लाल निशान में पहुंच गया।
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