भारत का गाजा, सीरिया, लेबनान और यमन में अमन स्थापित करने पर जोर

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न्यूयॉर्क। भारत ने मध्य-पूर्व के अस्थिर देशों में संघर्ष समाप्त करके शांति स्थापित करने की वकालत की है। भारत ने कहा है कि लगातार बातचीत और डिप्लोमेसी से ऐसे टिकाऊ हल निकलेंगे, जिनका लोगों की जिंदगी और इलाके की सिक्योरिटी पर अच्छा असर पड़ सकता है। भारत ने एक आजाद और कामयाब फिलिस्तीन के लिए अपना समर्थन दोहराया है और साथ ही सीरिया के नेतृत्व वाली और सीरिया के मालिकाना हक वाली पॉलिटिकल प्रोसेस का सपोर्ट किया है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने यहां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में मध्य पूर्व की स्थिति पर भारत का पक्ष रखते हुए यह बयान दिया। उन्होंने गाजा के मुद्दे पर कहा भारत गाजा लड़ाई खत्म करने के लिए यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के रेजोल्यूशन 2803 को लागू करने में हुई हालिया तरक्की पर ध्यान देता है। भारत इस मौके पर इस लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे को सुलझाने के लिए यूनाइटेड स्टेट्स की तारीफ भी करता है।

यूएन में भारत के स्थायी मिशन के एक बयान के अनुसार हरीश ने कहा कि गाजा का रिकंस्ट्रक्शन और इकोनॉमिक रिकवरी तथा पब्लिक सर्विसेज एवं ह्यूमनिटेरियन मदद की डिलीवरी फिर से शुरू करना एक बहुत बड़ा काम है, जिसके लिए फिलिस्तीनी भाइयों और बहनों के दर्द और तकलीफ को कम करने के लिए इंटरनेशनल कम्युनिटी से लगातार सपोर्ट और कमिटमेंट की जरूरत है। पिछले दो सालों में, हमने करीब 135 मीट्रिक टन दवाइयां और सप्लाई की हैं। 40 मिलियन डॉलर के भारतीय प्रोजेक्ट्स लागू होने के अलग-अलग स्टेज पर चल रहे हैं। कुल मिलाकर फिलीस्तीनी लोगों को अभी 170 मिलियन डॉलर से अधिक की मदद मिल रही है।

भारतीय राजनयिक ने कहा भारत सीरिया के दोस्ताना लोगों की मदद के लिए पूरी तरह से कमिटेड है, इसके लिए वह ह्यूमन सपोर्ट और सप्लाई देगा, और कैपेसिटी बिल्डिंग करेगा। यूएनडीओएफ में तीसरे सबसे बड़े कंट्रीब्यूटर के तौर पर, भारतीय पीसकीपर्स ने इसके मैंडेट को पूरा करने में इच्छाशक्ति और पक्का इरादा दिखाया है। उन्होंने कहा भारत लेबनान की शांति, स्टेबिलिटी और डेवलपमेंट के लिए कमिटेड है। 1998 से यूएनआईएफआईएल में 900 से ज्यादा भारतीय आर्मी के जवान तैनात हैं। हमने इस बात पर जोर दिया है कि पीसकीपर्स की सेफ्टी और सिक्योरिटी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हरीश ने कहा हम यमन में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान देने के साथ-साथ यमन के लोगों की मदद के लिए मानवीय ऑपरेशन को बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर देना चाहेंगे। दवाओं, मेडिकल इक्विपमेंट, वैक्सीन और खाने की सप्लाई के साथ-साथ कैपेसिटी बिल्डिंग और एजुकेशनल स्कॉलरशिप में हमारी मदद ने यमन के लोगों की मुश्किलों को कम करने में मदद की है।

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