- गृहमंत्री CM चुनाव बाद तय होने की बात कह चुके हैं,
पटना। लगता है कि प्रचार के निर्णायक दौर में भी बिहार एनडीए में जैसा दिखाया जा रहा है वैसा चल नहीं रह है। गृहमंत्री अमित शाह भले ही कह रहे हों कि जीत के बाद एनडीए तय कर लेगा कि बिहार का मुख्यमंत्री कौन होगा पर इसके उलट दानापुर में फिल्म अभिनेता और सांसद मनोज तिवारी कुछ अलग ही भाषा बोल रहे हैं। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने दानापुर में कहा कि इस बार के विधानसभा चुनाव में भी मुख्यमंत्री का चेहरा नीतीश कुमार ही हैं। वे यहीं पर नहीं रुके और यह भी कह दिया कि हमारे गठबंधन में मुख्यमंत्री का चेहरा पहले से ही तय है। सांसद मनोज तिवारी के इस बयान के बाद विपक्ष को प्रचार के दौरान यह कहने का मौका मिल जाएगा कि एनडीए तो मुख्यमंत्री ही तय नहीं है।
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दानापुर में चुनावी सभा के दौरान महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरा घोषित तेजस्वी यादव के बयान पर भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा, “2025 में मुख्यमंत्री चेहरा नीतीश कुमार ही हैं। ये (तेजस्वी यादव) पता नहीं कौन सी दुनिया में हैं? तेजस्वी बाबू को लड़ाई-झगड़ा करके अपना नाम लेना पड़ता है। हमारे में पहले से (मुख्यमंत्री का चेहरा) तय है…प्रधानमंत्री मोदी के दिल में बिहार है, दर्शन और विजन में बिहार है…”।
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दरअसल पिछले दिनों पटना आए गृहमंत्री ने एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में स्पष्ट कहा था कि एनडीए में जीत के बाद मुख्यमंत्री कौन होगा,, इसका फैसला चुनाव के बाद विधायक दल करेगा। उस वक्त मुख्यमंत्री आवास में दोनों के बीच करीब 15 मिनट तक बातचीत भी हुयी थी। वैसे टिकट की घोषणा और सीटों के बंटवारे के वक्त ही लगने लगा था कि गठबंधन में इस बार नीतीश कुमार बड़े भाई की भूमिका में नहीं है। स्थिति यहां तक आ गयी है कि चुनाव में CM फेस का फैसला भी बीजेपी ले रही है।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात करने के से पहले ही साफ कर चुके हैं कि एनडीए में जीत के बाद मुख्यमंत्री कौन होगा,, इसका फैसला चुनाव के बाद विधायक दल करेगा। बिहार चुनाव में एनडीए जीतेगा या महागठबंधन भारी पड़ेगा यह फैसला तो बाद में होगा पर अगर-मगर की स्थिति में नीतीश का पलड़ा बड़े भाई जैसा तो कतई नहीं लग रहा है। हालात भांपते हुए विपक्ष ने बड़े नेताओं ने भी यह कहना शुरू कर दिया कि नीतीश कुमार थक चुके हैं और भ्रमित दिखाई पड़ते हैं। वहीं देखना तो यह कि सांसद मनोज तिवारी के ताजा बयान के बाद बिहार की चुनावी फिजां में क्या असर दिखता है?
