लाभ पंचमी आज है जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि व लाभ पंचमी

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राजेन्द्र गुप्ता

लाभ पंचमी के दिन व्यवसाय से जुड़े लोग मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन विशेष रूप से बहीखातों और लेखा-जोखा आदि की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से साधक के सौभाग्य में वृद्धि होती है और उसे मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है। इतना ही नहीं, दिन को किसी नए काम की शुरुआत के लिए शुभ माना गया है।

लाभ पंचमी का शुभ मुहूर्त

कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 26 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त 3 बजकर 48 मिटन पर शुरू हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 27 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 4 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, इस बार लाभ पंचमी रविवार, 26 अक्टूबर को मनाई जाएगी। लाभ पंचमी पूजा मुहूर्त – सुबह 6 बजकर 29 मिनट से सुबह 10 बजकर 13 मिनट तक।

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लाभ पंचमी का महत्व

लाभ पंचमी का पर्व दीपावली के पांचवें पड़ता है। यह तिथि व्यवसायी लोगों के लिए खास महत्व रखती है। नई दुकान, व्यवसाय या फैक्ट्री शुरु करने के लिए इस दिन को अत्यंत शुभ माना गया है। इसी के साथ लाभ पंचमी पर नए खाता-बही का शुभारंभ करना भी काफी शुभ माना गया है। इस दिन नए बहीखातों पर शुभ-लाभ और स्वस्तिक का चिन्ह बनाकर उनका उद्घाटन भी किया जाता है। कई साधक इस दिन पर व्रत भी करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे आगामी वर्ष में व्यापार में वृद्धि के योग बनते हैं। साथ ही लाभ पंचमी की पूजा से व्यापार में उन्नति, सौभाग्य, परिवार में सुख-शांति और सभी प्रकार के कष्टों के निवारण होता है।

लाभ पंचमी की पूजा विधि

लाभ पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पूजा स्थल पर भगवान गणेश, शिव जी और देवी लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। गणेश जी को चंदन, सिंदूर, फूल और दूर्वा आदि अर्पित करें। भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र, धतूरे के फूल और सफेद वस्त्र अर्पित करें। लक्ष्मी जी की पूजा में हलवा और पूड़ी का भोग लगाएं और समृद्धि व सफलता की प्रार्थना करें। अंत में आरती करें और सभी लोगों में पूजा का प्रसाद बांटें।

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धन और सौभाग्य का दिन है लाभ पंचमी

लाभ पंचमी का नाम ‘लाभ’ यानी आर्थिक और भौतिक फायदा और ‘पंचमी’ यानी पांचवीं तिथि से मिलकर बना है। यह पर्व दीपावली उत्सव का समापन करता है और समृद्धि, सौभाग्य और ज्ञान की प्राप्ति का प्रतीक है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा से जीवन में आर्थिक स्थिरता, बाधा-मुक्ति और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। इस श्लोक (‘लाभस्तेषां जयस्तेषां कुतस्तेषां पराजयः येषामिन्दीवरश्यामो हृदयस्थो जनार्दनः।’) के मुताबिक जिनके हृदय में भगवान निवास करते हैं, उन्हें सदा लाभ और विजय प्राप्त होती है। गुजरात में लाभ पंचमी को गुजराती नववर्ष का पहला कार्यदिवस माना जाता है। इस दिन दीपावली के बाद बंद दुकानें और व्यवसाय दोबारा खोले जाते हैं। व्यापारी खाता-बही पर ‘श्री’, ‘स्वास्तिक’ और ‘ॐ’ अंकित कर पूजन करते हैं, ताकि वर्ष भर लाभ और समृद्धि बनी रहे।

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