झगड़े में युवक की मौत को दलित एंगिल देने में जुटे राहुल-अखिलेश

Rahul Gandhi
  • मायावती की कमजोर पकड़ या फिर दलित वोट कब्जाने की होड़
  • साल 2027 के पहले दलितों के लिए अभी और रहनुमा आएंगे बिल से बाहर
   अजय कुमार

लखनऊ। पूरे देश में एक बार फिर जातीय राजनीति उबाल मारने को तैयार दिख रहा है। लोगों ने कनखियों-कनखियों से बात करके माहौल बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। हरियाणा में IPS पति की आत्महत्या के बाद IAS पत्नी ने एक हफ्ते तक जबरदस्त माहौल बनाने की कोशिश की। उसे धार देने कांग्रेस के मुखिया राहुल गांधी भी पहुंचे। कुछ उसी तरह का माहौल पूरे देश में बनाया जा रहा है। ग्वालियर के ‘नीले कबूतरों’ की कहानी भी इसी में शामिल है। अब इस कड़ी में तीसरी जगह भी जुड़ रही है, वो है उत्तर प्रदेश का फतेहपुर जिला। एक ओर दलित युवक की हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है, वहीं दूसरी ओर इस घटना के बहाने सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीति भी शुरू हो गई है। सूबे की राजनीति में एक बार फिर जाति और समुदाय का सवाल उभरकर सामने आ गया है। पुलिस के मुताबिक घटना बीते सप्ताह फतेहपुर के एक गांव में हुई, जब गांव के कुछ दबंगों ने मामूली विवाद के बाद दलित समुदाय से आने वाले युवक पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद गांव में तनाव फैल गया, जिसे देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। योगी सरकार ने साफ कहा है कि दोषी कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

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इस बीच विपक्षी दलों को इस मुद्दे में राजनीति का नया अवसर दिखाई दे रहा है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने पूरी ताकत के साथ इस मामले को उछालते हुए सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि दलितों और पिछड़ों के खिलाफ अत्याचार प्रदेश में बढ़ते जा रहे हैं और योगी सरकार इन मुद्दों पर आंख मूंदे बैठी है। उन्होंने अपने प्रतिनिधिमंडल को पीड़ित परिवार से मिलने भेजा और सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार का कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण समाप्त हो गया है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में इस घटना को केंद्र बनाकर योगी सरकार और केंद्र सरकार दोनों पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने फतेहपुर पहुंचकर मृतक युवक के परिवार से मुलाकात की और कहा कि न्याय तभी संभव है जब सरकार अपनी जवाबदेही स्वीकार करे। लेकिन भाजपा नेताओं ने इसे कांग्रेस की ‘राजनीतिक नौटंकी’ करार देते हुए कहा कि विपक्ष को जनता के दर्द की नहीं, बल्कि वोट बैंक की चिंता है।

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भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता का कहना है कि योगी सरकार कानून के राज पर चलने वाली सरकार है, जिसने अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि फतेहपुर कांड के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और बाकी फरार आरोपियों की तलाश में चार टीमें गठित की गई हैं। आरोपी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है। वहीं मृतक परिवार को सरकारी मुआवजा और सुरक्षा मुहैया कराई गई है। भाजपा नेताओं के मुताबिक विपक्ष हर संवेदनशील मामले को सियासी मुद्दा में बदलकर जनता को गुमराह कर रहा है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, दोनों दल कानून व्यवस्था के मुद्दे पर गलत तस्वीर पेश कर रहे हैं, ताकि जनता में असंतोष फैलाया जा सके।

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राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि दलित समुदाय हमेशा से उत्तर प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता रहा है, इसलिए इस तरह की घटनाओं को विपक्षी दल जनाधार बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर उठाते हैं। राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच इस घटना को लेकर जो सक्रियता दिखाई दे रही है, उसे भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। कांग्रेस एक बार फिर प्रदेश में अपनी जमीन तलाश रही है, वहीं समाजवादी पार्टी भाजपा के खिलाफ बड़े विरोध फ्रंट की स्थिति बनाने की कोशिश कर रही है। लेकिन आम जनता के मन में अब भी यह सवाल बना हुआ है कि क्या इन राजनीतिक बयानों से मृतक परिवार को राहत मिलेगी।
घटना के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए गांव में लगातार गश्त और निगरानी बढ़ा दी है। जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने गांव का दौरा कर पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया है कि न्याय हर हाल में मिलेगा। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए विशेष अदालत में मामला चलाया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करने के निर्देश भी दिए हैं। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार प्रशासनिक कार्रवाई के दिखावे के पीछे असल सच्चाई को छिपा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं बल्कि सामाजिक अन्याय का प्रतीक है, जो बताता है कि समाज में समानता की भावना अब भी अधूरी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दलितों और पिछड़ों की आवाज उठाती रहेगी। वहीं समाजवादी पार्टी ने भी ऐलान किया है कि अगर दोषियों को तत्काल सजा नहीं मिली तो वे राज्यव्यापी आंदोलन करेंगे। इन तमाम राजनीतिक गतिविधियों के बीच दलित संगठनों ने भी फतेहपुर की घटना पर नाराजगी जताई है और राज्य सरकार से मृतक परिवार को सुरक्षित करने तथा समुदाय के खिलाफ अत्याचारों पर लगाम लगाने की मांग की है।

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प्रदेश भाजपा का मानना है कि विपक्ष का यह रवैया प्रदेश की शांति को भंग करने वाला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि योगी सरकार की नीति ‘अपराध और अपराधी दोनों पर प्रहार’ की है और सरकार बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई कर रही है। फतेहपुर जैसी घटनाओं का राजनीतिकरण करके विपक्ष समाज में विभाजन की रेखा खींचना चाहता है। भाजपा का आरोप है कि जब विपक्ष सत्ता में होता है तो दलितों और कमजोर वर्गों की परवाह नहीं करता, लेकिन सत्ता से बाहर होते ही उन्हें दलितों का सहारा याद आ जाता है। इस बीच स्थानीय प्रशासन ने गांव की निगरानी और बढ़ा दी है। पुलिस गांव में चौपाल लगा रही है, ग्रामीणों से संवाद कर रही है और सामुदायिक सद्भाव बनाए रखने की अपील कर रही है। जांच में शामिल अधिकारियों का कहना है कि मामला पूरी तरह निष्पक्ष ढंग से देखा जा रहा है और किसी भी स्तर पर दबाव नहीं डाला जाएगा। राज्य सरकार अदालत के माध्यम से जल्द सुनवाई की दिशा में आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की है और मृतक परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के किसी भी कोने में कानून को हाथ में लेने वाले को किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा।

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राजनीति की इस उठापटक के बीच फतेहपुर के गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव के लोग भय और चिंता में हैं, लेकिन उन्हें इस बात की उम्मीद भी है कि सरकार इस बार न्याय दिलाने में देर नहीं करेगी। जबकि विपक्षी दलों का जमावड़ा यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रह सकता है। चाहे राहुल गांधी हों या अखिलेश यादव, दोनों का लक्ष्य इस घटना को योगी सरकार के खिलाफ जन आक्रोश में बदलना दिखता है। हालांकि भाजपा के लिए यह अवसर अपने शासन और कानून व्यवस्था पर भरोसा दिखाने का है। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि उत्तर प्रदेश में कोई भी सामाजिक मुद्दा कितनी जल्दी राजनीतिक रंग ले लेता है। जनता की नजर अब सरकार की कार्रवाई और अदालत के फैसले पर टिकी है, जो यह तय करेगा कि फतेहपुर की यह त्रासदी सिर्फ राजनीति का मुद्दा बनती है या न्याय का उदाहरण बनती है।

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बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे कांशीराम ने अपने जमाने में सवर्णों के खिलाफ खूब जगह उगला। उनके जहर उगलते भाषणों (तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार) की बदौलत दलितों ने कुछ दिनों तक सवर्णों के खिलाफ खूब गालियां दीं। लेकिन समय के साथ सत्ता में आई मायावती ने अपना एंगल बदला और (हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा विष्णु महेश है) जैसे नारे गढ़े और इस खाई को थोड़ा सा पाटा भी। लेकिन अब उनकी कमजोर पड़ रही कमान को देखते हुए सभी दल दलितों को अपने पाले में खींचना चाह रहे हैं, शायद यही कारण है कि नई-नई कहानी गढ़कर दलित विमर्श को फिर से मुख्य धारा में लाने का उनका कुचक्र चल रहा है।

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