नई दिल्ली। दुनिया अभी रेग्रेशन की ओर है, यानी पीछे की दिशा में चल रही है। विकास की पहली परिभाषा स्त्रियों के अधिकारों की सुरक्षा है। अपने यहाँ औरतों को सौ साल बाद वोटिंग का अधिकार देने वाले अमेरिका ने कल उनसे एक बेहद ज़रूरी अधिकार छीन लिया। हाल ही में जारी संयुक्त राष्ट्र् की एक रिपोर्ट में बेहद चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर के 57 विकासशील देशों में आधी से अधिक महिलाओं को अपने पार्टनर के साथ सेक्स से इनकार करने की छूट नहीं है। साथ ही ये महिलाएं सेक्स के समय गर्भनिरोधक का इस्तेमाल भी नहीं कर पाती हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के द्वारा जारी की गई यह रिपोर्ट दुनिया के लगभग एक चौथाई देशों की आबादी को कवर करता है, जिसमें से आधे से अधिक अफ्रीकी महाद्वीप के देश हैं।

मिली जानकारी के अनुसार लाखों महिलाओं और लड़कियों के लिए शारीरिक स्थिति की भयावहता को दर्शाया गया है, जो अपने अधिकारों की मांग तक नहीं कर पाते हैं। इन देशों में महिलाओं के साथ संबंध बनाने के लिए डर और शारीरिक हिंसा का खुलेआम सहारा लिया जाता है।
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यूएन पॉपुलेशन फंड ने बताया कि 57 देशों में से केवल 55 फीसदी लड़कियां और महिलाएं ही यह तय कर पाती है कि उन्हें यौन संबंध बनाना है कि नहीं। बताया गया है कि महिलाएं अपने पार्टनर से सेक्स के दौरान गर्भनिरोधक का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं की मांग करने में सक्षम नहीं हैं। उनको यह आजादी नहीं मिली है। फंड की कार्यकारी निदेशक डॉ. नतालिया कनेम ने बताया कि शारीरिक स्वतंत्रता का इनकार महिलाओं और लड़कियों के मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन है। यह असमानताओं और हिंसा को मजबूत करता है।

यूएन पॉपुलेशन फंड द्वारा जारी रिपोर्ट का नाम My Body Is My Own है। इसमें बताया गया है कि पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका, कैरेबियन देशों में 76 फीसदी लड़कियां और महिलाएं सेक्स, गर्भनिरोधक और स्वास्थ्य देखभाल पर खुद निर्णय लेती हैं।
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परंतु, यह आंकड़ा अफ्रीका, मध्य और दक्षिण एशिया में 50 फीसदी से भी कम हो जाता है। अफ्रीका के तीन देशों माली, नाइजर और सेनेगल में महिलाओं की स्थिति सबसे ज्याद दयनयी है। खराब हैं। यहां केवल 10 फीसदी महिलाएं ही सेक्स को लेकर खुद निर्णय लेती है। जबकि कई अन्य देशों में ऐसे महिलाओं का आंकड़ा थोड़ा अधिक है।
