- सेक्स का सही समय क्या? सुबह दे एनर्जी, रात दिलाए सुकून, स्टडी में खुलासा
कई लोगों में सुबह के समय हार्मोन लेवल (जैसे टेस्टोस्टेरोन) अपेक्षाकृत ज्यादा होते हैं, जिससे इच्छा और ऊर्जा बेहतर महसूस हो सकती है। इससे दिन की शुरुआत पॉजिटिव मूड के साथ हो सकती है। वहीं कुछ लोग दिन भर के काम के बाद यह रिलैक्स करने, स्ट्रेस कम करने और पार्टनर के साथ इमोशनल कनेक्शन बढ़ाने के चक्कर में रात को सेक्स करना पसंद करते हैं। कई शोध बताते हैं कि लोगों को इसके बाद नींद भी बेहतर आती है। लेकिन एक बात दोनों पार्टनर को ध्यान रखना चाहिए कि अगर कोई बहुत थका हुआ है या मन नहीं है, तो रात का समय उतना अच्छा अनुभव नहीं देगा। उसी तरह सुबह जल्दीबाजी में भी मज़ा कम हो सकता है। असल में बेस्ट टाइम वही है जब दोनों पार्टनर कंफर्टेबल हों, पर्याप्त समय और प्राइवेसी हो तथा मानसिक रूप से भी जुड़ाव महसूस कर रहे हों।

आमतौर पर यह सवाल सभी के मन में उठता है कि सेक्स करने का सही तरीका क्या है? कुछ लोग सेक्स को प्रतिदिन किए जाने वाला कार्य समझते हैं। तो कुछ लोग इसके विपरीत है। सेक्स को लेकर कई रिर्सच हो चुकी है। लेकिन एक अध्ययन में पता चला है कि दिन में सेक्स करना उचित नहीं होता, क्योंकि दिन में तापमान गर्म होता है और आपस में सेक्स करने से हमारे शरीर से गर्मी उत्सर्जित होती हैं। जिस कारण से हमारे शरीर में गर्मी पैदा हो सकती हैं। लेकिन एक छोटा सा संतुलन भी ज़रूरी है कि अगर दिन बहुत थकाऊ रहा हो, तो ऊर्जा कम होने से इच्छा या एंगेजमेंट कम हो सकता है। इसलिए रात हमेशा बेहतर होती है। लेकिन हर किसी के लिए यह सच नहीं होता है।

इसी बात को अगर आयुर्वैदिक कारणों के मुताबिक जाने तो दिन में सेक्स करने से अगर किसी महिला को गर्भ रह जाए तो ऐसे में होने वाली संतान पित्त रोगी, गुस्सा वाला स्वाभाव, कठोर स्वाभाव, बेशर्म और कामुक स्वाभाव वाली हो सकती है।

जब महिला का मासिक धर्म चल रहा हो उस दौरान सेक्स नहीं करना चाहिए। हमेशा महिला का मासिक धर्म बंद होने के बाद ही सेक्स करें। जहां तक हो सके एक रात में एक ही बार सेक्स करें और दूसरी बार सेक्स करने में कम से कम चार से पांच घंटों का अंतर रखें। महिला जब गर्भधारण कर ले तो ऐसे में प्रारंभ के तीन महीनों तक महिला के साथ सम्बन्ध न बनाएं। इसके बाद चार, पांच और छठे वें महीने में दोनों के मन के अनुसार सावधानी पूर्वक संबंध बनाया जा सकता हैं।


शांति और समय : दिन के काम खत्म होने के बाद आमतौर पर कम बाधाएँ होती हैं, इसलिए बिना जल्दबाज़ी के एक-दूसरे पर ध्यान देना आसान होता है। इससे अनुभव ज़्यादा संतोषजनक हो सकता है।

रिलैक्सेशन और नींद: ऑर्गैज़्म के बाद शरीर में रिलैक्सेशन से जुड़े केमिकल (जैसे ऑक्सीटोसिन और प्रोलैक्टिन) बढ़ते हैं, जो शरीर को शांत करते हैं और नींद आने में मदद कर सकते हैं।
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