खेत में 11 हज़ार वोल्ट की चपेट में आकर जंगली हाथी की मौत, जंगल में दफनाया गया,

नया लुक ब्यूरो, रांची/हजारीबाग: झारखण्ड के हजारीबाग जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत चुटियारो पंचायत के सरोनी कला गांव में करंट लगने से एक हाथी की दर्दनाक मौत हो गई। किसान पटवन करने के लिए बिजली का तार अपने खेत में ले गये थे। उसी तार की संपर्क में आने से हाथी की मौत हुई।हाथी झुंड से अलग होकर खेत की ओर पहुंच गया। इसी दौरान वह जमीन से दस फीट ऊपर लटक रहे विद्युत प्रवाहित तार की चपेट में आ गया।
हाथी की मौत की खबर मिलते ही वन अधिकारियों में हड़कंप मच गया। वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे।पोस्टमार्टम के बाद मृत हाथी का जंगल में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।
ग्रामीणों के अनुसार सरोनी जंगल में दो दर्जन से अधिक जंगली हाथियों का झुंड कुछ दिनों से डेरा जमाये हुए है। हाथी दिन भर जंगल में घूमते रहते हैं और रात में गांव की ओर आ जाते हैं। सुबह करीब पांच बजे जब ग्रामीण खेतों में काम करने जा रहे थे तो उनकी नजर मृत हाथी पर पड़ी। इसकी सूचना स्थानीय थाना व वन विभाग को दी गयी। सूचना मिलने के बाद विभाग की टीम घटना स्थल पर पहुंची और जांच शुरू की।
ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना वन विभाग की लापरवाही के कारण हुई है। पिछले दिनों वन विभाग को हाथी के आने की सूचना मिली थी।अगर विभाग हरकत में आता तो हाथी को वापस जंगल भेजा जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे एक वयस्क हाथी की मौत हो गयी।

homeslider Jharkhand

झारखंड: जमशेदपुर का चाकुलिया एयरबेस, जहां लिखी गई थी जापान की तबाही की पटकथा

बहरागोड़ा में बरामद हुए बम करते हैं तथ्य की पुष्टि रंजन कुमार सिंह झारखंड के जमशेदपुर जिले में स्थित चाकुलिया का ऐतिहासिक एयरपोर्ट आज भी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की बची सबसे बड़ी निशानियों में से एक है। यह वह स्थान है जिसने न केवल युद्ध की भयावहता देखी, बल्कि उन विमानों को पनाह […]

Read More
Jharkhand

विश्व रंगमंच दिवस: बस्तर में 600 साल पुरानी रंग परंपरा, राजाओं से जनमानस तक का सफर

हेमंत कश्यप जगदलपुर। बस्तर में रंगमंच की परंपरा सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत के रूप में आज भी जीवित है। इसकी शुरुआत राजा भैराज देव के समय मानी जाती है, जब यहां नाटकों पर आधारित मंचन प्रारंभ हुआ। यह दौर बस्तर में एक सांस्कृतिक नवजागरण के रूप में देखा जाता है, जिसने लोकजीवन में कला और […]

Read More
Jharkhand

विश्व रंगमंच दिवस पर विशेष: 625 वर्षों से जीवित है बस्तर की रंगमंच परंपरा

हेमंत कश्यप जगदलपुर। बस्तर की धरती पर रंगमंच की परंपरा कोई नई नहीं, बल्कि सदियों पुरानी विरासत है। लगभग 625 वर्षों से यहां नाट्य कला जीवंत रूप में फल-फूल रही है। इस समृद्ध परंपरा की नींव बस्तर के राजा भैराज देव ने रखी थी, जिन्होंने मंचीय कार्यक्रमों की शुरुआत कर सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को नई दिशा […]

Read More