विश्व रंगमंच दिवस: बस्तर में 600 साल पुरानी रंग परंपरा, राजाओं से जनमानस तक का सफर

Untitled 2 copy 24

विश्व रंगमंच दिवस:

हेमंत कश्यप

जगदलपुर। बस्तर में रंगमंच की परंपरा सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत के रूप में आज भी जीवित है। इसकी शुरुआत राजा भैराज देव के समय मानी जाती है, जब यहां नाटकों पर आधारित मंचन प्रारंभ हुआ। यह दौर बस्तर में एक सांस्कृतिक नवजागरण के रूप में देखा जाता है, जिसने लोकजीवन में कला और अभिव्यक्ति को नई दिशा दी। इस परंपरा को आगे बढ़ाने का श्रेय रथपति राजा पुरुषोत्तम देव को जाता है। वर्ष 1408 में रथयात्रा की शुरुआत के साथ मंचन में पौराणिक कथाओं का समावेश हुआ। गोंचा और दशहरा जैसे लोकपर्वों में ये प्रस्तुतियां शामिल होती गईं और आगे चलकर बस्तर की नाट्य परंपरा का आधार बनीं।

रंगमंच से बनी बस्तर की पहचान

नगर के रंगकर्मियों-अयूब खान, सुभाष पांडे, एम.ए. रहीम, हिमांशु शेखर झा, शिवनारायण पांडे, लखेश्वर खुदराम और महेंद्र सिंह ठाकुर—के अनुसार, बस्तर का हिन्दी रंगमंच 19वीं सदी में देश में विकसित हो रहे रंगमंच के साथ कदमताल करता नजर आता है। सन् 1909 में बस्तर रियासत के संरक्षण में रामलीला मंडलियों को आमंत्रित किया गया, जिससे यहां की रंग-चेतना को नया विस्तार मिला और सृजन के नए अंकुर फूटे।

विश्व रंगमंच दिवस पर विशेष: 625 वर्षों से जीवित है बस्तर की रंगमंच परंपरा

रामलीला से आधुनिक रंगमंच तक

1914 में राजा रुद्र प्रताप देव के संरक्षण में पहली रामलीला पार्टी का गठन हुआ, जिसने रामकथा को मंच पर जीवंत किया। इसके बाद 1921 के आसपास अंग्रेज अफसर टकर डब्ल्यू.बी. की पहल पर ‘अमेच्योर थिएट्रिकल सर्विस’ की स्थापना हुई, जो आगे चलकर ‘आर्य बांधव थिएटर’ के नाम से प्रसिद्ध हुई। इस मंच ने ‘राजा हरिश्चंद्र’, ‘खूबसूरत बला’ और ‘अमर सिंह राठौर’ जैसे नाटकों का मंचन किया। उस दौर में जगदलपुर राजबाड़ा के सामने स्थित कुंवर भवन का विशाल प्रांगण नाट्य प्रस्तुतियों का प्रमुख केंद्र बन गया था। 1929 में ‘सीताराम नाटक मंडली’ का उदय हुआ, जिसने ‘वीर अभिमन्यु’ जैसे नाटकों से दर्शकों के मन में वीरता और संवेदना की लहर पैदा की। वहीं 1940 में ‘सत्य विजय थिएट्रिकल सोसाइटी’ ने ‘दानवीर कर्ण’, ‘व्याकुल भारत’ और ‘श्रवण कुमार’ जैसे नाटकों के माध्यम से हिन्दी रंगमंच को और गहराई दी।

जन-जन तक पहुंचा रंगमंच

विशेष बात यह रही कि उस समय अंग्रेज अफसरों ने भी इन नाट्य मंचनों को प्रोत्साहित किया, जिससे यह परंपरा अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंची। बस्तर के कलाकार केवल राजदरबार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि आम जनमानस में भी बेहद लोकप्रिय हुए। उनके नाटकों में हास्य और व्यंग्य का ऐसा प्रभाव था, जो तत्कालीन सत्ता पर भी तीखा कटाक्ष करता था।

ये भी पढ़ें

लखनऊ में पेट्रोल को लेकर अफवाह से मचा हड़कंप, पंपों पर लगी लंबी कतारें

भारत-ईयू मानवाधिकार वार्ता: लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों पर मंथन

1950 का ऐतिहासिक सांस्कृतिक महाकुंभ

बस्तर के हिन्दी रंगमंच इतिहास में 21 अक्टूबर 1950 का दिन मील का पत्थर साबित हुआ, जब जगदलपुर में मध्य प्रादेशिक हिन्दी साहित्य सम्मेलन का चतुर्दश अधिवेशन आयोजित हुआ। यह आयोजन बस्तर के लिए किसी सांस्कृतिक महाकुंभ से कम नहीं था। इसमें पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, क्षितिमोहन सेन और डॉ. रामकुमार वर्मा जैसे महान साहित्यकारों की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक बना दिया। इस सम्मेलन के स्वागताध्यक्ष महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव थे, जबकि संयोजन पं. सुन्दर लाल त्रिपाठी ने किया। विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर बस्तर की यह गौरवशाली परंपरा न केवल अतीत की याद दिलाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कला कैसे समय के साथ बदलते हुए भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है।

Spread the love

Ranchi
Jharkhand

हलाला के बाद पति का दुबारा शादी से इन्कार करना अपराध नहीं: HC

नया लुक ब्यूरो Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और देश के सामान्य आपराधिक कानून के तहत एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि तलाक और महिला की किसी अन्य व्यक्ति से शादी हलाला प्रक्रिया के बाद यदि पहला पति उससे दोबारा निकाह करने से इनकार […]

Spread the love
Read More
Patna
Bihar Health Jharkhand

बिहार-झारखंड में बढ़ी टिरज़ेपाटाइड की मांग, युरपीक की बिक्री में 20.8% मासिक उछाल

Patna: मोटापे और उससे जुड़े मेटाबॉलिक स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को लेकर लोगों की सोच में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। अब वजन कम करने के साथ-साथ लोग लंबे समय तक स्वस्थ रहने, ब्लड शुगर और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने पर भी ध्यान दे रहे हैं। इसी बदलाव का असर बिहार […]

Spread the love
Read More
Ranchi
Jharkhand

वीडियो बना रहे युवक को थप्पड़ जड़ने पर बीडीओ को ग्रामीणों ने बनाया बंधक

BDO करने गये थे SIR की समीक्षा नया लुक ब्यूरो Ranchi: सरिया प्रखंड में गुरुवार को SIR के दाैरान प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) ललित नारायण तिवारी को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया है। इस दाैरान उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया। गुरुवार को सरिया प्रखंड विकास पदाधिकारी ललित नारायण तिवारी अपने कुछ सहकर्मियों के साथ प्रखंड […]

Spread the love
Read More