
नोएडा प्राधिकरण में सचिव रहते हुए लीजबैक घोटाले में आया था हरीश चंद्र का नाम
15 साल बाद योगी सरकार ने की बड़ी कार्यवाही, सेवा से मुक्त हुए चंद्र
राकेश तिवारी
Lucknow : साल 2011 में नोएडा प्राधिकरण में सचिव रहते हुए नियमों के विरुद्ध बाहरी लोगों और कंपनियों को जमीन का आवंटन करने वाले तत्कालीन सचिव हरिश्चंद्र को उत्तर प्रदेश सरकार ने 15 साल बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया। नियुक्ति विभाग के अनुसार चंद्र के खिलाफ विभागीय कार्रवाई वर्ष 2013 से चल रही थी। हरीश चंद्र वर्तमान में कोलकाता, पश्चिम बंगाल में खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ PCS अधिकारी हरीश चंद्र (1997 बैच) को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। नोएडा विकास प्राधिकरण में उनके कार्यकाल के दौरान हुए करोड़ों रुपये के लीजबैक घोटाले में संलिप्तता के आरोपों के बाद यह कार्रवाई की गई है। इस मामले में करीब 3,800 से 4,000 करोड़ रुपये की बाजार कीमत वाली जमीन के नियम विरुद्ध आवंटन का मामला सामने आया था।
प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक IAS एम. देवराज ने उनकी बर्खास्तगी के आदेश जारी किए हैं। वह उत्तर प्रदेश के वरिष्ठतम PCS अधिकारियों में शामिल थे। उनके बाद वरिष्ठता क्रम में दूसरे नंबर पर तैनात प्रभुनाथ के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई चल रही है।
3.81 लाख वर्ग मीटर जमीन का हुआ था लीजबैक
मामला वर्ष 2011 का है, जब हरीश चंद्र नोएडा प्राधिकरण में सचिव पद पर तैनात थे। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने ग्राम शहदरा के सेक्टर-140ए, 141, 142 और 143 में आने वाली करीब 3,81,527 वर्ग मीटर अर्जित भूमि को निर्धारित नियमों के विपरीत बाहरी लोगों और निजी कंपनियों के नाम लीजबैक कर दिया था। नियमों के मुताबिक लीजबैक की सुविधा केवल संबंधित गांव के पात्र किसानों के लिए थी। इसके तहत प्रति परिवार अधिकतम 450 वर्ग मीटर जमीन देने का प्रावधान था। हालांकि, विभागीय जांच में सामने आया कि इन नियमों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को 15,000 वर्ग मीटर से अधिक के भूखंड आवंटित किए गए। इन भूखंडों की बाजार कीमत करीब 3,800 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
साल 2013 से चल रही थी अनुशासनिक कार्रवाई
इस मामले में वर्ष 2013 से ही हरीश चंद्र के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की जा रही थी। मामले की जांच नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) IAS रितु माहेश्वरी ने की थी। जांच में नियमों के उल्लंघन और जमीन आवंटन में अनियमितताओं से जुड़े तथ्य सामने आए थे। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार ने उनकी बर्खास्तगी का फैसला लिया। इसे भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
IAS में पदोन्नति पर भी लगा था ब्रेक
लीजबैक घोटाले की जांच का असर हरीश चंद्र के करियर पर भी पड़ा। इसी मामले में चल रही विभागीय कार्रवाई के कारण उनकी IAS संवर्ग में पदोन्नति की प्रक्रिया अटकी हुई थी। अब सरकार के बर्खास्तगी के फैसले के बाद उनका प्रशासनिक करियर समाप्त हो गया है।
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2 thoughts on “नोएडा के 4000 करोड़ के घोटाले में वरिष्ठ PCS अधिकारी सेवा से बाहर”
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