
Mumbai: अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत लगातार जारी रहे तो मुश्किल हालात भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। महाराष्ट्र की पूजा तानाजी गायकवाड़ की कहानी इसी जज्बे की मिसाल है। उन्होंने महज 22 साल की उम्र में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा में पूरे राज्य में दूसरी रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना पूरा किया।
पूजा की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा मजबूत नहीं थी। उनकी मां अरुणा तानाजी गायकवाड़ खुद सिर्फ सातवीं कक्षा तक पढ़ी थीं, लेकिन उन्होंने बेटी की पढ़ाई और उसके सपनों को पूरा करने में हर संभव सहयोग किया।
पढ़ाई में शुरू से रही शानदार
पूजा ने स्कूल के दिनों से ही पढ़ाई में अपनी मेहनत का परिचय दिया। उन्होंने 10वीं कक्षा में 90 प्रतिशत और 12वीं में 91 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसी दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारी बनने का लक्ष्य तय कर लिया था। इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की। वर्ष 2016 में परिवार की आर्थिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद पूजा ने करीब पाँच हजार रुपये से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की और इसी राशि से जरूरी किताबें खरीदीं।
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पहली कोशिश में बनीं नायब तहसीलदार
पूजा की मेहनत का नतीजा पहली ही कोशिश में सामने आया। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा पास की और नायब तहसीलदार के पद के लिए चयनित हुईं। हालांकि, उन्होंने इसे अपनी मंजिल नहीं माना। उनके मन में डिप्टी कलेक्टर बनने का लक्ष्य था और उन्होंने आगे की तैयारी जारी रखी। पूजा के मुताबिक, अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने रोजाना करीब 14 से 15 घंटे तक पढ़ाई की। लंबे समय तक पढ़ाई करने के लिए अनुशासन और निरंतरता उनकी तैयारी का अहम हिस्सा रहे।
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मां ने बेटी के सपने को बनाया अपना मिशन
पूजा की सफलता में उनकी मां अरुणा गायकवाड़ की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। मां ने बेटी को पढ़ाई के लिए ऐसा माहौल देने की कोशिश की, जिसमें उसे घर के कामों की चिंता न करनी पड़े। अरुणा समय पर बेटी के लिए खाना तैयार करतीं और लगातार उसका हौसला बढ़ाती रहीं। खुद कम पढ़ी-लिखी होने के बावजूद उन्होंने बेटी की शिक्षा को प्राथमिकता दी और उसके प्रशासनिक अधिकारी बनने के सपने में पूरा साथ दिया।
दूसरी कोशिश में हासिल की राज्य में दूसरी रैंक
नायब तहसीलदार बनने के बाद भी पूजा ने अपनी तैयारी नहीं छोड़ी। उन्होंने दोबारा MPSC परीक्षा दी और इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे महाराष्ट्र में दूसरी रैंक हासिल की। इस सफलता के साथ महज 22 वर्ष की उम्र में उनका डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना पूरा हो गया। पूजा की कहानी बताती है कि आर्थिक चुनौतियां, सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियां लक्ष्य के रास्ते में बाधा जरूर बन सकती हैं, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत के सामने इन्हें पार किया जा सकता है।
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