विजय के बहाने तृषा पर वार, उदयनिधि की सियासत पर उठे सवाल

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संजय सक्सेना
संजय सक्सेना

Politics तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां मुद्दों की बहस पीछे छूट गई है और व्यक्तिगत चरित्र हनन सामने आ गया है। तंजावुर में तीन अगस्त 2026 को कावेरी जल विवाद को लेकर डीएमके के विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने जो टिप्पणी की, उसने पूरे राज्य को हिला दिया। भीड़ में जब ‘तृषा… तृषा…’ के नारे लगे तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “पानी यहां पहुंचे या न पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचना चाहिए… मैं कावेरी की बात कर रहा हूं।” यह डबल मीनिंग वाली बात तुरंत वायरल हो गई और सोशल मीडिया पर सैकड़ों पोस्ट्स में इसे घिनौना, अशोभनीय और महिला अपमान बताया गया।कावेरी का मुद्दा कोई नया नहीं है। जून में 9.9 TMC और जुलाई में 32 TMC पानी मिलना था, कुल 42 TMC का अधिकार था, लेकिन अगस्त की शुरुआत तक एक बूंद भी नहीं पहुंची।

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डेल्टा के किसान सूखे खेतों में खड़े हैं, कुरुवै फसल बर्बाद हो रही है, मेकेदातु बांध का खतरा सिर पर है। उदयनिधि ने सही मुद्दे पर बोलने की कोशिश की, लेकिन जब तृषा कृष्णन का नाम भीड़ से उठा तो उन्होंने मौके का इस्तेमाल कर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को निशाना बनाने की कोशिश की। तृषा पिछले दो दशकों से तमिल सिनेमा की सम्मानित चेहरा हैं। 2004 की घिल्ली से लेकर 2023 की लियो तक विजय के साथ उनकी जोड़ी रही है। 2025-26 में विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम द्वारा चेंगलपट्टू कोर्ट में तलाक याचिका दाखिल होने के बाद तृषा और विजय की करीबी को लेकर अटकलें तेज हुईं।

तृषा ने खुद विजय के 52वें जन्मदिन पर पोस्ट कर अफवाहों को खारिज किया था, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह नाम बार-बार उछाला जाता रहा। यह पहली बार नहीं है जब उदयनिधि ने व्यक्तिगत हमला बोला हो। जून 2026 में विधानसभा में उन्होंने विजय पर तंज कसते हुए कहा था कि चेंगलपट्टू कोर्ट में पत्नी पति को ढूंढ रही है। पूरी तमिलनाडु इस कहानी को जानती है। उससे पहले भी उन्होंने सासकाला सहित कई महिलाओं पर टिप्पणियां की थीं। डीएमके खुद को द्रविड़ियन मॉडल और महिला सम्मान का झंडाबरदार बताती रही है, लेकिन तंजावुर वाली घटना ने इस दावे की पोल खोल दी। टीवीके महिला विंग ने तंजावुर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। थाना ने बीएनएस की छह धाराओं, तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम की धारा 4 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत एफआईआर दर्ज की। 4 अगस्त की सुबह चेन्नई के नीलंगराई स्थित घर से पुलिस ने उदयनिधि को हिरासत में लिया।

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उन्हें तंजावुर ले जाया जाना था। टीवीके ने राष्ट्रीय महिला आयोग में भी याचिका दाखिल की जिसमें कहा गया कि यह टिप्पणी अश्लील, वस्तुकरण करने वाली और यौन सुझाव देने वाली थी।बीजेपी प्रवक्ता नारायणन तिरुपथी ने इसे घिनौना, अश्लील और शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा कोई भी मां-बहन-बेटी वाला व्यक्ति नहीं बोल सकता। टीवीके विधायक रेवंथ चरन ने लिखा कि यह पूरी तरह अस्वीकार्य है और डीएमके नेतृत्व राजनीतिक स्तर गिरा रहा है। फिल्म इंडस्ट्री से भी आवाजें उठीं। चिन्मयी श्रीपादा और खुशबू सुंदर जैसे नामों ने विरोध जताया। सोशल मीडिया पर हजारों यूजर्स ने पूछा कि क्या अब राजनीति सिर्फ किसी बेकसूर महिला के नाम को घसीटकर चलेगी। तृषा ने अब तक कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन उनका चुप रहना भी बहुत कुछ कहता है। एक महिला जो दशकों की मेहनत से अपनी जगह बना चुकी है, उसे सिर्फ राजनीतिक स्कोरिंग के लिए ‘चीरहरण’ की आग में झोंकना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

उदयनिधि के पास मौका था। भीड़ में नाम उठते ही वे मंच से साफ कह सकते थे कि किसी महिला का नाम लेकर तंज कसना गलत है। ऐसा कहने से वे सिर्फ नेता नहीं, बल्कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के रूप में उभरते। लेकिन उन्होंने मुस्कुराकर टिप्पणी कर दी। इससे साफ है कि जब मुद्दों पर जवाब नहीं बचता तो निजी जिंदगी का सहारा लिया जाता है। विजय की टीवीके सरकार पर रोजगार, शिक्षा, कर्ज माफी, 200 यूनिट मुफ्त बिजली जैसे वादों के अधूरेपन के सवाल उठाने चाहिए थे। मई 2026 में ही उदयनिधि ने किसानों को ठगे जाने का आरोप लगाया था कि 5 एकड़ तक के किसानों का पूरा कर्ज माफ करने का वादा सिर्फ 50 हजार तक सीमित कर दिया गया। कावेरी पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर हुई। लेकिन तंजावुर में ये सब पीछे रह गए।तमिलनाडु की जनता समझदार है।

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वह जानती है कि हार-जीत चलती रहती है, लेकिन नैतिकता गिराने वाला नेता लंबे समय तक टिक नहीं पाता। अगर राजनीति का स्तर यही रहा तो अगले चुनावों में सत्ता का सपना अधूरा रह सकता है। विजय से लड़ना है तो नीतियों के मैदान में आओ। किसी महिला के सम्मान की बलि चढ़ाकर राजनीति चमकाने की सोच बंद करो। तृषा जैसी महिलाएं उद्योग की पहचान हैं, राजनीतिक हथियार नहीं। उदयनिधि की यह टिप्पणी सिर्फ उनके व्यक्तिगत चरित्र की नहीं, बल्कि उस राजनीतिक संस्कृति की पोल खोलती है जो द्रविड़ मॉडल का नाम लेकर महिलाओं का सम्मान करने का दावा करती है। कावेरी का पानी किसानों तक पहुंचे या न पहुंचे, लेकिन राजनीति का स्तर जरूर गिर गया है। यह घटना याद दिलाती है कि लोकतंत्र की असली परीक्षा सिद्धांतों पर होती है, व्यक्तिगत हमलों पर नहीं।

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