करोड़ों के टेंडर घोटाले में बड़ा एक्शन, बिहार के तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर शिकंजा

Tender scams

Tender scams बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार अधिकारियों में बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) के अधिकारी मुमुक्षु चौधरी, भवन निर्माण विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास और नगर विकास एवं आवास विभाग के कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह शामिल हैं। तीनों पर पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप हैं।

ED की छापेमारी में करोड़ों रुपये नकद मिले थे

इस मामले ने तब तूल पकड़ा था जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मार्च 2025 में छापेमारी की थी। जांच के दौरान तारिणी दास के ठिकानों से करीब 8.50 करोड़ रुपये, मुमुक्षु चौधरी के यहां से 2 करोड़ रुपये और उमेश कुमार सिंह के ठिकानों से लगभग 1 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। इतनी बड़ी नकदी बरामद होने के बाद जांच एजेंसियों ने सरकारी ठेकों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच तेज कर दी थी।

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तीनों अधिकारियों पर क्या हैं आरोप?

विशेष निगरानी इकाई के अनुसार, तीनों अधिकारियों के खिलाफ पद का दुरुपयोग कर अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया है। मुमुक्षु चौधरी पर आरोप है कि सीतामढ़ी और सहरसा में नगर आयुक्त रहते हुए उन्होंने ठेकेदार रिशु की कंपनियों को करोड़ों रुपये के ठेके दिलाए और बदले में रिश्वत ली। तारिणी दास पर सरकारी परियोजनाओं में कमीशन लेने और ठेकों में अनियमितता को बढ़ावा देने का आरोप है। उमेश कुमार सिंह पर ठेकेदारों और एजेंसियों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार करने तथा बिल भुगतान में अनियमित लाभ लेने के आरोप लगे हैं।

रिशु श्री से जुड़े ठेकों की हो रही गहन जांच

टेंडर घोटाले की जांच का केंद्र ठेकेदार रिशु और उनकी कंपनियों से जुड़े सरकारी ठेके हैं। ED की रिपोर्ट के आधार पर विशेष निगरानी इकाई पहले से ही बुडको, जल संसाधन विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग समेत कई सरकारी विभागों में दिए गए ठेकों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां वीरपुर (सुपौल) स्थित फिजिकल मॉडलिंग सेंटर परियोजना, सहरसा नगर निगम में डस्टबिन और अन्य उपकरणों की खरीद, तथा नालों के जैविक उपचार से जुड़ी योजनाओं में कथित गड़बड़ियों की भी पड़ताल कर रही हैं।

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IAS अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में कुछ IAS अधिकारियों के नाम भी जांच के दायरे में हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि सरकारी ठेकों के आवंटन और भुगतान प्रक्रिया में किन-किन अधिकारियों की भूमिका रही। विशेष निगरानी इकाई और अन्य एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

भ्रष्टाचार पर सरकार की सख्ती

बिहार में सरकारी ठेकों से जुड़े भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। करोड़ों रुपये की नकदी बरामद होने और वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद इस मामले ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

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