रवि लामिछाने का भारत दौरा संपन्न, दोनों देशों के रिश्तों पर टिकी नजरें

Nepal

Nepal नेपाल में सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने पांच दिवसीय भारत यात्रा पूरी कर शुक्रवार को काठमांडू वापस लौट गए। नेपाल में वाया जेन जी आंदोलन सत्ता परिवर्तन के बाद शासक दल के किसी उच्च पदस्थ राजनेता की यह बहुप्रतीक्षित यात्रा थी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि लामिछाने के पहले प्रधानमंत्री बालेन शाह के भारत आगमन की चर्चा थी, लेकिन किन्हीं कारणों से वे नहीं आ पाए। उनकी जगह पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने का भारत आगमन हुआ। भारत में अपने नन्हे पड़ोसी राष्ट्र के शीर्ष नेता का स्वागत किस अंदाज में हुआ, दुनिया ने इसे आंख खोलकर देखा। रवि लामिछाने की प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, गृहमंत्री अमित शाह, सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, भाजपा के विदेश विभाग प्रमुख विजय चौथालोई आदि नेताओं से हुई शानदार मेल मिलाप देख चीन को निसंदेह आश्चर्य हुआ होगा। कुल मिलाकर नेपाल के सत्ता रूढ़ दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष का भारत यात्रा बहुत शानदार रहा और इसकी तारीख नेपाल में विपक्षी दल भी कर रहे हैं। मधेश से ताल्लुक रखने वाले राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रकाश राजौरिया कहते हैं कि इससे पहले भारत जाने वाले नेपाल के राजाओं का भी स्वागत इतने शानदार तरीके से नहीं हुआ होगा। उन्होंने कहा भारत ने नेपाल का दिल जीत लिया। रवि लामिछाने की भारत यात्रा काफी सुखद और संतोष जनक रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने ट्विटर एक्स पर खुद ऐसा कहा है। उन्होंने कहा कि नेपाल को लेकर भारत की नीति हमेशा सकारात्मक ही रही है। नेपाल के नई सरकार के साथ मिलकर भारत नेपाल के लिए बहुत कुछ अच्छा करना चाहेगा।

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नेपाल में जब भी नई सरकार सत्तासीन होती है तो भारत और चीन में इस बात को लेकर उत्सुकता बढ़ जाती है कि नेपाल का नया निजाम अपने पहले विदेश यात्रा में किस देश को तरजीह देता है? रवि लामिछाने की भारत यात्रा को तरजीह देने का संदेश बड़ा है। रवि लामिछाने की भारत यात्रा नेपाल में राजनीतिक अफरातफरी के बीच संपन्न हुआ। काठमांडू प्रतिनिधि सभा में प्रधानमंत्री बालेन शाह के सीमावर्ती भू क्षेत्रों पर कब्जा संबंधी दिए गए एक बयान के बाद विपक्ष हरकत में आ गया और सरकार के खिलाफ हमलावर हो उठा। लेकिन रवि लामिछाने के भारत में उच्च राजनीतिक मेल-मिलाप में आठ सूत्रीय जो एजेंडा सामने आया, उससे नेपाल का विपक्ष खुद को धराशाई महसूस कर रहा है। नेपाल के ही एक राजनीतिक विश्लेषक ने रवि लामिछाने की भारत यात्रा और उनके एजेंडे पर संतोष की सांस लेते हुए कहा कि चलो देर आयद दुरुस्त आये। अर्थात नेपाल के नई सरकार के किसी उच्च पदस्थ राजनेता की भारत यात्रा जरूर देर में हुई लेकिन नेपाल के लिए सुखद रही।

नेपाल में पूर्व की सरकार में गृहमंत्री और उप प्रधानमंत्री रहे रवि लामिछाने जाने माने टीवी जर्नलिस्ट भी हैं और वे नेपाल के लिए भारत के महत्व को बखूबी समझते हैं। उन्होंने भारत और नेपाल के बीच जरूरी आठ बिंदुओं को रेखांकित किया है। देखा जाय तो यह न केवल भारत के लिए भी संतोषजनक है बल्कि दोनों देशों के बीच सदियों की मधुरता और रोटी बेटी के रिश्ते को और मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। रवि लामिछाने के आठ प्रमुख बिंदुओं में सबसे बड़ा मसला सीमा क्षेत्रों में कब्जे को लेकर है। इस मसले पर अपनी बेबाक राय रखते हुए रवि लामिछाने ने कहा कि नेपाल-भारत संबंधों को भू-राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर विकास, निवेश, व्यापार, ऊर्जा और आर्थिक साझेदारी के नए युग में प्रवेश कराने की आवश्यकता है। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत, व्यावहारिक तथा भविष्य उन्मुख बनाने पर जोर दिया। रवि लामिछाने ने कहा कि नेपाल और भारत के बीच संबंधों की जो परिभाषा है उसे बदलने का समय आ गया है। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच सहयोग का आधार केवल राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद नहीं, बल्कि साझा विकास और आर्थिक समृद्धि होना चाहिए। कहा कि नेपाल-भारत संबंधों की बुनियाद विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने सीमा सहित सभी लंबित विवादों को संवाद, ऐतिहासिक तथ्यों और आपसी समझदारी के माध्यम से हल करने पर ज़ोर दिया।

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उन्होंने जुमलों की राजनीति से बचते हुए व्यावहारिक समाधान खोजने की वकालत की। रक्सौल-काठमांडू रेलमार्ग को दोनों देशों के बीच सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक परियोजनाओं में से एक बताते हुए उन्होंने कहा कि इस रेल संपर्क के शुरू होने से व्यापार, पर्यटन, माल ढुलाई और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव आएगा। उन्होंने पोखरा और लुंबिनी के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को प्रभावी बनाने के लिए पोखरा और लुंबिनी से दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे भारतीय शहरों तक सीधी उड़ानें शुरू करने को जरूरी बताते हुए कहा इससे दोनों देशों के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने ‘काठमांडू-बेंगलुरु डिजिटल कॉरिडोर’ विकसित करने की बात कही। उनका मानना है कि डिजिटल भुगतान, फिनटेक और सीमा-पार डिजिटल प्लेटफॉर्म दोनों देशों के युवा उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं। उन्होंने भारत की प्रतिष्ठित शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थाओं को नेपाल में विस्तार करने का आह्वान किया। उनके अनुसार नेपाल में आईआईटी और एम्स जैसे संस्थानों की स्थापना से शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाइयां मिल सकती हैं। भारत पहले ही नेपाल में उच्च स्वास्थ्य व्यवस्था की पेशकश कर चुका है। रवि लामिछाने ने भी गुजरात को विकास का माडल माना है। वहां के औद्योगिक विकास मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि नेपाल-भारत सीमा क्षेत्र में संयुक्त रूप से रासायनिक उर्वरक उद्योग स्थापित करने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि इससे कृषि उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगा।

नेपाल की विशाल जलविद्युत क्षमता को भारत के औद्योगिक विकास से जोड़ने की वकालत करते हुए उन्होंने एकीकृत ऊर्जा बाजार के निर्माण की आवश्यकता बताई। साथ ही आधुनिक एकीकृत चेकपोस्ट, सुगम ट्रांजिट व्यवस्था और व्यापारिक अवरोधों को कम करने पर भी जोर दिया। आईपीएल खेल को भी द्विपक्षीय सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए रवि लामिछाने ने भविष्य में नेपाली खिलाड़ियों के साथ-साथ नेपाली स्टेडियमों को भी आईपीएल फ्रेंचाइजी संरचना से जोड़ने की संभावना व्यक्त की। उनका मानना है कि खेल दोनों देशों के लोगों को और अधिक निकट ला सकता है, इससे दोनों देशों के नागरिकों में भाईचारगी बढ़ेगी।

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रवि लामिछाने ने नेपाल में हुए राजनीतिक परिवर्तन को “बैलेट बॉक्स क्रांति” की संज्ञा देते हुए कहा कि देश की नई पीढ़ी विकास, सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित राजनीति चाहती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एक आकांक्षी नेपाल और उभरता हुआ भारत मिलकर दक्षिण एशिया में सहयोग, समृद्धि और स्थिरता का नया अध्याय लिख सकते हैं। फिलहाल भारत की ओर से रवि लामी छाने के सभी आठों बिंदुओं के साथ आगे बढ़ने का आश्वासन दिया गया है। भारत ने भी दोनों देशों के लिए रवी लामी छाने के आठ सूत्रीय एजेंडे की सराहना की है और इसे हर दृष्टि से बेहतर माना है। रवि लामिछाने के इस एजेंडे को देख नेपाल के अच्छे अच्छे विश्लेषक आश्चर्य चकित हैं। लोगों का मानना है कि नेपाल में गणतंत्र के सूर्योदय के बाद सर्वथा पहली मर्तबा सरकार का कोई जिम्मेदार ओहदेदार साफ सुथरा और स्पष्ट एजेंडे के साथ अपने विश्वसनीय पड़ोसी देश की यात्रा पर गया है। रवि लामिछाने के एजेंडे पर अमल करते हुए दोनों देश आगे बढ़ पाए तो यह नेपाल और भारत दोनों देशों के लिए बेहतर होगा ही, इसका संदेश भी दूर तलक जाएगा।

उमेश चन्द्र त्रिपाठी/मनोज कुमार त्रिपाठी

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