सांसत में न आए सरकार, इसलिए प्याज पर नहीं करेंगे तकरार
नया लुक ब्यूरो
नई दिल्ली\ Government Onion Procurement 2026 : एक बार सरकार गंवा चुकी भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब प्याज को लेकर काफी संजीदा दिख रही है। सरकार ने फैसला किया है कि इस बार वो प्याज का पूरा स्टॉक स्वयं खरीदने जा रही है। इस खबर से किसानों में बड़ी राहत देखने को मिल सकती है। साल 1977 से 1980 में जनता पार्टी की सरकार में प्याज की कीमतें काफी बढ़ गई थीं, 1980 के आम चुनाव में इंदिरा गांधी ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था। यहां तक कि वो दिल्ली की सड़कों पर प्याज का माला पहनकर भी घूमीं थीं। वहीं मई 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में पोखरण में परमाणु परीक्षण हुआ, लेकिन प्याज की बढ़ती कीमतों के कारण दिल्ली-राजस्थान में सरकार नहीं बचा पाए थे। शायद यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी काबीना प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पूरी प्याज खुद खरीदना चाह रहे हैं।
12.35 रुपये प्रति किलो पर होगी प्याज की खरीद
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र के सतारा में एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि सरकार अब किसानों से 12.35 रुपये प्रति किलोग्राम (1235 रुपये प्रति क्विंटल) की दर से प्याज खरीदेगी।
उन्होंने साफ कहा कि सरकार किसानों की फसल को सुरक्षित करने के लिए पूरा स्टॉक खरीदेगी, ताकि उन्हें बाजार में गिरती कीमतों से नुकसान न उठाना पड़े।
नाफेड को मिले निर्देश
सरकार ने इस फैसले को लागू करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) को जिम्मेदारी सौंपी है। नाफेड अब किसानों से प्याज खरीदने और वितरण प्रक्रिया को संभालेगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण प्याज का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें गिर गई हैं।
निर्यात में गिरावट से बढ़ी समस्या
सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और आयात-निर्यात बाधाओं के कारण भारतीय प्याज की मांग कम हो गई है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ा है। विशेष रूप से महाराष्ट्र, जो देश का प्रमुख प्याज उत्पादक राज्य है, वहां किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों की नाराजगी भी सामने आई
हालांकि सरकार के इस फैसले का स्वागत किया गया है, लेकिन महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ (MSOGA) ने इसे पर्याप्त नहीं बताया है। संघ का कहना है कि 12.35 रुपये प्रति किलो की दर उत्पादन लागत को भी पूरा नहीं करती। किसानों ने मांग की है कि प्याज की खरीद कम से कम 3000 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर होनी चाहिए। इसके अलावा, जिन किसानों ने पहले ही कम कीमतों पर प्याज बेचा है, उनके लिए मुआवजे की भी मांग की गई है।
विरोध की चेतावनी
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इससे आने वाले समय में कृषि नीति को लेकर और बहस तेज हो सकती है।
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3 thoughts on “बड़ा फैसला : ‘No if, No But’ पूरा प्याज खुद खरीदेगी सरकार”
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