राजेन्द्र गुप्ता
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी और शुक्ल पक्ष त्रयोदशी को मनाया जाता है। वर्ष 2026 के वैशाख मास, कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को यह व्रत गुरुवार, 14 मई को पड़ रहा है। गुरुवार का दिन गुरु (बृहस्पति) ग्रह को समर्पित है। जब प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ता है, तो इसे गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की संध्या काल (सूर्यास्त से पूर्व की दो घड़ी) में पूजा करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, बाधाएँ दूर होती हैं, तथा गुरु ग्रह मजबूत होता है।
प्रदोष व्रत का धार्मिक, पौराणिक एवं ज्योतिषीय महत्व
‘प्रदोष’ का अर्थ है – संध्या काल, विशेष रूप से सूर्यास्त से पहले और बाद का समय। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव एवं पार्वती पृथ्वी पर विचरण करते हैं। प्रदोष काल में किया गया शिव पूजन, अभिषेक और मंत्र जप सामान्य दिनों की तुलना में अनेक गुना अधिक फलदायी होता है। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने इसी प्रदोष काल में ग्रहण किया था। इसलिए इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बिल्वपत्र चढ़ाने से विषैले प्रभाव (ग्रह दोष, रोग) नष्ट होते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से, त्रयोदशी तिथि का स्वामी चंद्रमा का एक अंश है, लेकिन प्रदोष का प्रभाव शिव से जुड़ा है। जब यह तिथि गुरुवार (बृहस्पतिवार) को पड़ती है, तो गुरु (ज्ञान, धन, विवाह, संतान) की शुभता और शिव की कृपा दोनों एक साथ मिलती है। गुरु प्रदोष विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जिनकी कुंडली में गुरु कमजोर है, विवाह में विलंब हो रहा है, या व्यापार/शिक्षा में बाधाएँ आ रही हैं।
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तिथि, नक्षत्र, प्रदोष काल एवं ग्रह स्थितियाँ
वैशाख कृष्ण : त्रयोदशी – प्रारंभ 13 मई 2026, रात्रि 10:55 बजे, समाप्त 14 मई 2026, रात्रि 09:20 बजे। उदया तिथि के अनुसार व्रत 14 मई को किया जाएगा।
प्रदोष काल : सूर्यास्त से 1.5 घंटे पूर्व और 1.5 घंटे बाद। प्रदोष काल ~05:35 PM से 08:35 PM। इसी दौरान पूजन करें।
प्रदोष व्रत विधि : गुरुवार प्रदोष पूजन
व्रत का संकल्प: प्रातः स्नान के बाद संकल्प लें “मैं आज प्रदोष व्रत रखूंगा, संध्या काल में भगवान शिव का पूजन करूंगा, और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करूंगा।”
दिन का आहार: व्रती दिन में केवल एक बार फलाहार (दूध, फल, साबूदाना) ले सकते हैं। कठोर व्रती निर्जला (बिना जल) भी रख सकते हैं, किंतु स्वास्थ्य ध्यान में रखें।
प्रदोष काल में पूजन (सायं 5:35 – 8:35 बजे):
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (सफेद या पीला – गुरुवार के लिए पीला शुभ) पहनें।
- शिवलिंग या शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। पीले या सफेद पुष्प, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, मदार के फूल चढ़ाएँ।
- शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल से अभिषेक करें। विशेष रूप से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का उच्चारण करते हुए प्रत्येक द्रव्य से अभिषेक करें।
- बिल्वपत्र 3 पत्तों का एक समूह बिल्व दल शिवलिंग पर चढ़ाएँ। प्रत्येक बिल्वपत्र के साथ मंत्र: “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्”।
- धूप, दीपक (घी का दीपक या तिल के तेल का दीपक) जलाएँ।
- नैवेद्य – खीर, पंचामृत, फल, मिठाई (पीले रंग की – बेसन के लड्डू, केसरिया हलवा) अर्पित करें।
- शिव पुराण या शिव चालीसा का पाठ करें। शिव सहस्रनाम का पाठ भी फलदायी है।
- प्रदोष व्रत कथा सुनें या पढ़ें। इस कथा में शिव की कृपा से राजा मान्धाता को पुत्र प्राप्ति और ऋण मुक्ति की कहानी है।
- आरती करें और प्रणाम करें।
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दान: ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराएँ, गाय को हरा चारा या गुड़ खिलाएँ। गुरुवार के दिन पीले वस्त्र, पीले फल (केले), हल्दी, चने की दाल, सोना या पीतल का दान शुभ होता है।
व्रत पारण: अगले दिन (15 मई) सूर्योदय के बाद, स्नान-पूजन करके अन्न ग्रहण करें।
प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक एवं ग्रह दोष निवारण संदेश
प्रदोष व्रत केवल शिव की उपासना नहीं, बल्कि मन को एकाग्र करने और कर्मों के प्रभाव को शुद्ध करने का दिन है। ज्योतिषीय रूप से, यह व्रत विशेष रूप से चंद्र दोष, मंगल दोष, शनि दोष और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव को कम करता है। जब प्रदोष गुरुवार को पड़ता है, तो गुरु (बृहस्पति) – जो ज्ञान, धर्म, संतान और व्यापार का कारक है – की कृपा प्राप्त होती है। जिनकी कुंडली में गुरु नीच का हो, अस्त हो, या शत्रु राशि में हो, उनके लिए गुरु प्रदोष व्रत अमृत समान है। इस दिन किया गया शिव पूजन और गुरु मंत्र का जप चमत्कारिक परिणाम देता है।
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गुरु प्रदोष पर विशेष उपाय
गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए: प्रदोष काल में पीले वस्त्र पहनकर शिवलिंग पर पीले पुष्प (गेंदा, सरसों) चढ़ाएँ। केले का पेड़ जल दें। “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
विवाह बाधा / मांगलिक दोष के लिए: प्रदोष काल में 11 बिल्वपत्र पर “ॐ नमः शिवाय” लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएँ। इसके बाद 11 कन्याओं को पीले वस्त्र दान करें।
ऋण मुक्ति के लिए: शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय “ॐ नमः शिवाय ऋण मोचनाय नमः” का 21 बार उच्चारण करें। प्रदोष के बाद ताँबे का सिक्का नदी में प्रवाहित करें।
व्यापार/शिक्षा में उन्नति के लिए: प्रदोष के दिन पीले रंग की मिठाई (बेसन के लड्डू) बनाकर शिव को अर्पित करें, फिर उसे किसी विद्वान ब्राह्मण या शिक्षक को दान करें।
स्वास्थ्य लाभ (रोग निवारण): शिवलिंग पर चंदन, दूध, गंगाजल से अभिषेक करें। फिर उसी जल को घर के सभी सदस्यों पर छिड़कें।
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