लक्ष्मी पंचमी व्रत आज: धन, समृद्धि और शुभारंभ का पावन अवसर

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राजेन्द्र गुप्ता

लखनऊ। चैत्र नवरात्र और हिंदू नववर्ष की शुरुआत के साथ आने वाला लक्ष्मी पंचमी का पर्व आज, सोमवार 23 मार्च 2026 को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन धन, समृद्धि और सौभाग्य की कामना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष के प्रारंभिक दिनों में जब लोग नए संकल्प और योजनाएं बनाते हैं, ऐसे में लक्ष्मी पंचमी साधकों को अपने जीवन, गृहस्थी और कार्यक्षेत्र को मां महालक्ष्मी की कृपा से जोड़ने का विशेष अवसर प्रदान करती है। यह पर्व केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शुद्धता, सकारात्मकता और सत्कार्यों की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जाता है।

तिथि और शुभ मुहूर्त

लक्ष्मी पंचमी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष पंचमी तिथि 22 मार्च की रात 9:16 बजे से शुरू होकर 23 मार्च की शाम 6:38 बजे तक रहेगी। चूंकि पूरे दिन पंचमी तिथि विद्यमान है, इसलिए आज ही व्रत, पूजा और विशेष अनुष्ठान करना शास्त्रसम्मत माना गया है।

 क्यों कहलाती है कल्पादि तिथि?

लक्ष्मी पंचमी को “कल्पादि तिथि” के रूप में भी विशेष महत्व प्राप्त है। वैदिक मान्यता के अनुसार, यह तिथि ब्रह्मांडीय स्तर पर एक नए आरंभ का प्रतीक मानी जाती है। हिंदू पंचांग में वर्ष भर में कुल सात कल्पादि तिथियां होती हैं, जिनमें गुड़ी पड़वा, उगादि और अक्षय तृतीया जैसे महत्वपूर्ण पर्व शामिल हैं। लक्ष्मी पंचमी भी इन्हीं विशेष दिनों में गिनी जाती है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।

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आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व

लक्ष्मी पंचमी का दिन नववर्ष के पहले सप्ताह में आता है, जो पूरे साल की दिशा तय करने वाला समय माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से

  • आर्थिक स्थिति में स्थिरता आती है,
  • व्यापार और नौकरी में उन्नति के योग बनते हैं,
  • गृहस्थ जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है,

कई व्यापारी इस दिन अपनी दुकानों, कार्यालयों और तिजोरी की विशेष पूजा करते हैं और नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत शुभ तरीके से करते हैं।

लक्ष्मी पंचमी पूजा विधि

लक्ष्मी पंचमी की पूजा सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। पूजा का क्रम इस प्रकार है,

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ या लाल, पीले, गुलाबी वस्त्र धारण करें
  • घर या कार्यस्थल पर उत्तर या पूर्व दिशा में मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें
  • लक्ष्मी मंत्र और स्तोत्र का जप कर वातावरण को पवित्र बनाएं
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें
  • चंदन, अक्षत, फूल, नारियल, सुपारी, दूर्वा आदि अर्पित करें
  • श्रीयंत्र या लक्ष्मी चरण चिह्न स्थापित करना शुभ माना जाता है
  • अंत में विधिवत आरती करें और प्रसाद वितरित करें
  • पूजा के पश्चात ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा देना भी पुण्यदायी माना गया है।

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