
Gold vs Silver: US-ईरान तनाव के बीच सोना खरीदें या चांदी? किसमें ज्यादा फायदा, जानें एक्सपर्ट की राय
Gold vs Silver : US-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में भी अस्थिरता देखने को मिल रही है। ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल है कि मौजूदा हालात में गोल्ड या सिल्वर में से किसमें निवेश के अवसर बेहतर हो सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, दोनों धातुओं पर असर डालने वाले कारक अलग-अलग हैं।
तनाव के बीच गोल्ड और सिल्वर में करेक्शन
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच गोल्ड और सिल्वर दोनों अपने ऊंचे स्तरों से नीचे आए हैं। युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के दौरान सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन एसेट की मांग का फायदा मिल सकता है। वहीं, चांदी की कीमतों पर इंडस्ट्रियल डिमांड और आर्थिक गतिविधियों का भी बड़ा असर पड़ता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका की सैन्य गतिविधियों में कमी और अपने बंदरगाहों पर लगी पाबंदियां हटाने की स्थिति में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने की पेशकश की है। इससे आगे कमोडिटी मार्केट की दिशा प्रभावित हो सकती है।
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ऊंचे स्तरों से नीचे आया सोना और चांदी
लाइव मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद स्पॉट गोल्ड और सिल्वर दोनों में करेक्शन देखने को मिला है। स्पॉट गोल्ड अपने करीब 5,500 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पीक से लगभग 10-20 फीसदी नीचे आया है, जबकि सिल्वर में करीब 12-15 फीसदी का करेक्शन देखा गया। घरेलू बाजार में भी इसी तरह की चाल देखने को मिली। MCX गोल्ड अपने 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर के युद्धकालीन उच्च स्तर से लगभग 12-15 फीसदी नीचे आया, जबकि MCX सिल्वर करीब 2.75 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के हाई से लगभग 10-14 फीसदी फिसला।
क्यों आई कीमती धातुओं में कमजोरी?
कीमती धातुओं में गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से महंगाई की चिंता बढ़ी है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व समेत प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की आशंका बनी है। इसके अलावा मजबूत अमेरिकी डॉलर इंडेक्स ने भी डॉलर में कीमत वाले गोल्ड और सिल्वर को विदेशी निवेशकों के लिए महंगा किया है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तनाव के शुरुआती दौर में ब्रेंट क्रूड 60 फीसदी से ज्यादा चढ़कर करीब 118-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। सितंबर में ब्रेंट करीब 98-101 डॉलर और WTI करीब 90-94 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहा।
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Gold का क्या है आउट लुक?
LKP Securities के VP रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण सोने में अस्थिरता बनी रह सकती है। उन्होंने गोल्ड के लिए 1,51,000-1,54,500 रुपये की संभावित रेंज बताई है। उनके अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सोने को कुछ सपोर्ट मिल रहा है, जबकि डॉलर इंडेक्स के 100 के ऊपर रहने से सोने पर दबाव बना हुआ है।
Silver को लेकर क्या है अनुमान?
Ventura के Head of Commodity & CRM एनएस रामास्वामी के मुताबिक, सिल्वर के लिए 63-75 डॉलर प्रति औंस की संभावित रेंज देखी जा रही है। उनके अनुसार, ब्याज दरों, डॉलर और इंडस्ट्रियल डिमांड में बदलाव के कारण सिल्वर में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
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Gold vs Silver: किसमें क्या फर्क?
गोल्ड और सिल्वर दोनों कीमती धातुएं हैं, लेकिन दोनों की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक अलग हैं। SEBI रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव के समय गोल्ड को सेफ-हेवन एसेट के तौर पर फायदा मिल सकता है। वहीं, सिल्वर की कीमत पर इंडस्ट्रियल डिमांड और आर्थिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण असर पड़ता है। यानी जहां गोल्ड को वैश्विक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की मांग से सपोर्ट मिल सकता है, वहीं सिल्वर के प्रदर्शन में औद्योगिक मांग की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
एक्सपर्ट की निवेशकों को क्या सलाह?
Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज के मुताबिक, दोनों धातुओं में मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए निवेशकों को हर शॉर्ट-टर्म मूवमेंट पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए। उनके अनुसार, लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए अलग-अलग समय पर खरीदारी पर विचार किया जा सकता है। वहीं, लीवरेज्ड ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को पोजिशन साइज और स्टॉप-लॉस को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
Gold या Silver किसे चुनें?
मौजूदा हालात में गोल्ड और सिल्वर दोनों की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। भू-राजनीतिक तनाव के दौरान गोल्ड को सेफ-हेवन डिमांड का फायदा मिल सकता है, जबकि सिल्वर में इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण तेजी और गिरावट दोनों अपेक्षाकृत अधिक हो सकती हैं। इसलिए निवेश का फैसला करते समय निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता, निवेश की अवधि और बाजार की स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए। किसी भी कमोडिटी में निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की सलाह लेना उचित है।
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