मारे गये गैंगस्टर विक्रम शर्मा से जुड़े स्टोन क्रेशर में अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध!

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देहरादून। बारह साल पहले झारखंड के गैंगेस्टर विक्रम शर्मा (परिजन) को उत्तराखंड के बाजपुर इलाके में स्टोन क्रेशर चलाने का लाइसेंस मिल गया था। 2013 का यह आदेश तत्कालीन अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा के हस्ताक्षर से जारी किया गया। उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। और विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री थे। स्टोन क्रेशर विक्रम के भाई अरविंद शर्मा की कम्पनी के नाम था।

इसके बाद सत्तारूढ़ भाजपा की सरकार में 7 नवंबर 2019 को औद्योगिक विकास अनुभाग की ओर से जारी आदेश में स्टोन क्रेशर लाइसेंस की अवधि पांच साल और बढ़ाई गयी। लाखों के जुर्माने के बावजूद नवीनीकरण की तारीख 15 दिसम्बर से 2018 से मान्य की गई। और आगामी पांच वर्ष के लिए विभिन्न्न शर्तों एवं प्रतिबन्धों के साथ स्टोन क्रेशर का नवीनीकरण किया गया।

नवीनीकरण आदेश में मैसर्स अमृत स्टोन क्रशर प्रा. लि., ग्राम कनौरी, तहसील बाजपुर पर बीते सालों के लगभग 42 लाख जुर्माना अदा करने को भो कहा गया। इससे साफ जाहिर है कि गैंगेस्टर विक्रम शर्मा ने उत्तराखंड के सत्ता के गलियारों में विशेष घुसपैठ बना ली थी। विक्रम की हत्या के बाद कुमाऊं के कमिश्नर दीपक रावत के साथ वॉयरल फोटो भो चर्चाओं के केंद्र में है।

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विक्रम शर्मा के भाई की कम्पनी को स्टोन क्रेशर का लाइसेन्स दिलवाने के पीछे प्रदेश सरकार के अफसरों की भी विशेष भूमिका की जॉच भी प्रमुख मुद्दा बन गया है। झारखंड पुलिस द्वारा विक्रम शर्मा की 2017 में देहरादून से गिरफ्तारी के बाद भी उत्तराखण्ड का सरकारी सिस्टम सोया रहा। झारखंड की जेल से रिहा होने के बाद विक्रम शर्मा ने देहरादून को ठिकाना बनाया। और अफसरशाही व नेताओं से मिलीभगत कर पिस्टल का लाइसेंस भी हासिल कर लिया। देहरादून के सहस्त्रधारा रोड स्थित अपार्टमेंट में निवास कर रहे विक्रम को स्थानीय पुलिस भी नजरअंदाज करती रही। गैंगेस्टर की मौत के बाद उसकी कुल संपत्ति एक हजार करोड़ की बताई जा रही हैं।

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बीते 13 फरवरी को विक्रम शर्मा की सिल्वर सिटी मॉल में सुबह दस बजे हत्या कर दी गयी थी। हत्यारे अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। लेकिन प्रदेश में गैंगेस्टर को 2013 व 2019 में कृपा करने वाले नेताओं और अधिकारियों के नाम काफी चर्चा में है। 2013 व 2019 में जारी आदेश के ‘लाभार्थी’ अधिकारियों की गैंगेस्टर विक्रम से रिश्तों की कहानी की सच्चाई से पर्दा उठना अभी बाकी है। एक गैंगेस्टर के परिजनों के नाम स्टोन क्रेशर का लाइसेंस जारी करने में किस किस अधिकारी की विशेष भूमिका रही। यह जांच का मुद्दा बनता जा रहा है। सत्ता के गलियारों में भी स्टोन क्रेशर व पिस्टल लाइसेंस प्रक्रिया से जुड़े तत्कालीन अधिकारियों के नामों की चर्चा भी शुरू हो गयी है।

 

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