महर्षि आजाद दुबे
भारत की वैश्विक उपस्थिति आज केवल राजनीतिक या सांस्कृतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक शक्ति के रूप में भी स्थापित हो रही है। एक ओर प्रधानमंत्री Narendra Modi इजरायल दौरे पर रक्षा, तकनीक और सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने में जुटे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath सिंगापुर और जापान में निवेशकों से संवाद कर प्रदेश को वैश्विक निवेश मानचित्र पर स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। ये दोनों यात्राएँ भारत की बदलती कूटनीतिक और आर्थिक सोच की झलक प्रस्तुत करती हैं।
Israel भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार रहा है। रक्षा तकनीक, साइबर सुरक्षा, कृषि नवाचार और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ा है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा इस सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में अत्याधुनिक रक्षा तकनीक और खुफिया साझेदारी भारत की सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ कर सकती है।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जापान और सिंगापुर दौरा “राज्य-स्तरीय आर्थिक कूटनीति” का उदाहरण है। Japan और Singapore जैसे तकनीकी और औद्योगिक रूप से उन्नत देशों के निवेशकों को आकर्षित करना उत्तर प्रदेश की औद्योगिक महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएँ प्रदेश को रोजगार और औद्योगिक विकास के नए अवसर दे सकती हैं।
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संघीय ढांचे में वैश्विक सोच
इन यात्राओं का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी है कि भारत में अब केवल केंद्र ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारें भी वैश्विक निवेश और साझेदारी की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। यह संघीय ढांचे को मजबूत करने के साथ प्रतिस्पर्धात्मक विकास मॉडल को भी बढ़ावा देता है।
कूटनीति से विकास तक
आज की दुनिया में कूटनीति केवल राजनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं रही। यह सुरक्षा, तकनीक, व्यापार, निवेश और नवाचार के व्यापक नेटवर्क का निर्माण करती है। इजरायल के साथ रक्षा सहयोग और जापान-सिंगापुर के साथ आर्थिक साझेदारी, दोनों मिलकर भारत के भविष्य की विकास यात्रा को गति दे सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की रणनीतिक कूटनीति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आर्थिक सक्रियता भारत के दो समानांतर लेकिन परस्पर पूरक आयामों को दर्शाती है। यदि रक्षा सुरक्षा और आर्थिक निवेश दोनों दिशाओं में यह गति बनी रही, तो भारत न केवल वैश्विक शक्ति संतुलन में मजबूत स्थिति बनाएगा, बल्कि राज्यों के स्तर पर विकास की नई कहानियाँ भी लिखी जाएंगी।
