ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले ने अब कानूनी रूप से नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। यह याचिका उनके अधिवक्ताओं राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश के माध्यम से कोर्ट में प्रस्तुत की गई है। इस याचिका पर अदालत में जल्द सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है। पूरा विवाद तब सामने आया जब तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिला अदालत में एक अर्जी दाखिल की। इस अर्जी में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विशेष अदालत (रेप एवं पॉक्सो) के न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने और जांच शुरू करने का निर्देश दिया था।
अदालत के आदेश का पालन करते हुए झूंसी थाना, प्रयागराज की पुलिस ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और कुछ अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर माने जा रहे हैं, क्योंकि संबंधित धाराओं में दोष सिद्ध होने पर 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। यही वजह है कि शंकराचार्य की ओर से अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है, ताकि गिरफ्तारी से पहले कानूनी सुरक्षा मिल सके।
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कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अदालत सभी तथ्यों और साक्ष्यों की गहन जांच करती है। अग्रिम जमानत का फैसला आरोपों की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपी के सहयोग जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करता है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। दूसरी ओर, शंकराचार्य की अग्रिम जमानत याचिका पर अदालत का फैसला इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
