- इलाज के लिए जेल वार्डर को नहीं मिला अवकाश
- वार्डर की पत्नी ने अधीक्षक पर लगाए गंभीर आरोप
नया लुक संवाददाता
लखनऊ। मिर्जापुर जेल अधीक्षक की तानाशाही का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया। जेल में तैनात वार्डर इलाज के लिए अवकाश लेने के लिए गिड़गिड़ाता रहा लेकिन अधीक्षक पसीजे। अधीक्षक के इस रवैए की वजह से समय पर उपचार नहीं मिल पाने की वजह से वार्डर की मौत हो गई। मृतक वार्डर के परिजनों ने इस सच की पुष्टि की है। उधर विभाग के आला अफसरों ने इस गंभीर मामले पर चुप्पी साध रखी है।
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मिली जानकारी के मुताबिक जौनपुर के ख़ेतसराय थाना क्षेत्र के हरण गांव निवासी वार्डर आनंद शुक्ला का स्थानांतरण मिर्जापुर जिला जेल पर हुआ था। पिछले करीब छह माह से मिर्जापुर जेल पर तैनात वार्डर की पिछले कई दिनों से तबियत खराब थी। बीते रविवार को तबियत बिगड़ने पर उसने इलाज के लिए जेल अधीक्षक से अवकाश की मांग की। सूत्रों का कहना है कि जेल अधीक्षक ने वार्डर को अवकाश देने के बजाए जेल अस्पताल के डॉक्टर से इलाज कराने की बात कही। इसी बीच वार्डर आनंद शुक्ला की हालत और अधिक गंभीर हो गई।
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सूत्रों का कहना है कि गंभीर हालत में वार्डर को उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। जिला अस्पताल के इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने वार्डर आनंद शुक्ला को मृत घोषित कर दिया। इसकी जानकारी होते ही वार्डर की पत्नी प्रीति शुक्ला अस्पताल पहुंची। पत्नी ने आरोप लगाते हुए बताया कि उनके पति के पैरों में झनझनाहट की शिकायत थी। वह इसका इलाज करा रहे थे। इलाज के लिए उन्होंने जेल अधीक्षक को छुट्टी का आवेदन भी दिया था लेकिन उन्हें छुट्टी नहीं दी गई। पत्नी का कहना कि पति ने फोन कर बताया कि छुट्टी नहीं मिल रही है। मेडिकल लेने के लिए भी बोला था लेकिन मिला नहीं। अधीक्षक की संवेदनहीनता का यह मामला जेल सुरक्षाकर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर अटकलें लगाई जा रही है कि समय पर इलाज नहीं मिल पाने की वजह से वार्डर की मौत हो गई।
