लक्ष्मीपुर के एकमा डिपो से इंजन ले जाने पहुंची टीम को ग्रामीणों ने बैरंग लौटाया, पर्यटन विकास की उठी मांग

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  उमेश चन्द्र त्रिपाठी

महराजगंज! जनपद महराजगंज स्थित सोहगी बरवा वन्य जीव संरक्षण क्षेत्र में संचालित एशिया की सबसे पुरानी ट्राम्बे इंजन में से एक ऐतिहासिक ट्राम्बे इंजन को लेकर गुरुवार को बड़ा घटना-क्रम सामने आया। वर्ष 1924 से 1982 तक संचालित रही यह ट्राम्बे इंजन लक्ष्मीपुर स्थित एकमा डिपो से टेढ़ी घाट होते हुए जंगल चौराहा तक चलती थी। इसका संचालन उत्तर प्रदेश वन विभाग द्वारा वन संपदा, विशेषकर लकड़ी के परिवहन के लिए किया जाता था। इतिहास के पन्नों में दर्ज यह ट्राम्बे लाइन केवल वन विभाग के कार्यों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पूरे यात्रा मार्ग में पड़ने वाले ग्रामीणों की साप्ताहिक बाजार एवं आवश्यक वस्तुओं की जरूरतों को भी पूरा करता था। वर्षों तक यह ट्राम्बे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक जीवनरेखा बना रहा।

बताया जा रहा है कि वर्तमान में संरक्षित ट्राम्बे इंजन, सैलून और अन्य सामग्री को उत्तर प्रदेश वन विभाग द्वारा भारतीय रेलवे को हस्तांतरित कर दिया गया है। इसी क्रम में गुरुवार को ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों की टीम एकमा डिपो पहुंची और इंजन व अन्य सामान को अपने साथ ले जाने की तैयारी करने लगी। हालांकि, स्थानीय लोगों की तत्परता और कड़े विरोध के चलते टीम को बिना इंजन लिए ही बैरंग लौटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि यह ट्राम्बे महराजगंज की ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे जिले से बाहर ले जाना क्षेत्र की पहचान को खत्म करने जैसा होगा। इसी मुद्दे को लेकर सामाजिक संगठन ‘देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति’ का प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष जितेंद्र राव के नेतृत्व में एकमा डिपो पहुंचा।

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समिति ने सरकार से इस कार्य को तत्काल रोकने की मांग करते हुए ट्राम्बे इंजन और संबंधित सामग्रियों को यहीं संरक्षित करने का आग्रह किया। समिति का प्रस्ताव है कि एकमा डिपो से देवदह बनर्सिहा होते हुए रामग्राम और चौक बाजार तक इस ऐतिहासिक ट्राम्बे लाइन को पर्यटन परियोजना के रूप में पुनः संचालित किया जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल जिले की ऐतिहासिक पहचान को नया जीवन मिलेगा, बल्कि पर्यटन विकास के माध्यम से राजस्व में वृद्धि और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। समिति ने सोशल मीडिया के माध्यम से माननीय सांसद, माननीय मुख्यमंत्री एवं माननीय प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप कर इस धरोहर को संरक्षित करने की मांग की है। इस अवसर पर समिति के उपाध्यक्ष महेन्द्र जायसवाल, महामंत्री लक्ष्मी चन्द्र पटेल, संरक्षक अशोक जैसवाल, प्रहलाद गौतम, रोहित गौतम, पूर्व प्रधान एवं शिक्षक मनोज कनौजिया सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

 

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