नई दिल्ली/वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के बाद कि भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर सभी टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं हटाने पर सहमति जता दी है, व्हाइट हाउस ने इस समझौते से जुड़ी एक फैक्टशीट जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। व्हाइट हाउस ने इस डील को “ऐतिहासिक” करार देते हुए कहा है कि यह अमेरिकी उत्पादों के लिए भारत के विशाल बाजार को और अधिक खोलने की दिशा में बड़ा कदम है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, यह अंतरिम व्यापार समझौता 140 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ताओं वाले भारतीय बाजार तक अमेरिकी कंपनियों की पहुंच को आसान बनाएगा। हालांकि फैक्टशीट में यह भी साफ किया गया है कि भारत ने सभी अमेरिकी उत्पादों पर पूरी तरह से जीरो टैरिफ लगाने की कोई सार्वभौमिक प्रतिबद्धता नहीं दी है, बल्कि चुनिंदा क्षेत्रों में टैरिफ घटाने या समाप्त करने पर सहमति बनी है।
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फैक्टशीट के अनुसार, अमेरिका और भारत ने पारस्परिक शुल्क यानी रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर भी समझौता किया है। इसके तहत अमेरिका ने भारतीय आयात पर लगने वाले शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है। यह फैसला भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताने के बाद लिया गया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि इसी आश्वासन के आधार पर भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ हटाने का निर्णय हुआ। समझौते की शर्तों पर नजर डालें तो भारत ने कई अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने या खत्म करने का वादा किया है। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे उत्पाद शामिल हैं। इससे अमेरिकी किसानों और निर्यातकों को बड़ा फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
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इसके अलावा भारत ने ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में अमेरिका से बड़े पैमाने पर खरीदारी करने की प्रतिबद्धता भी जताई है। व्हाइट हाउस के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पाद खरीद सकता है। इसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में नई मजबूती के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जीरो टैरिफ को लेकर ट्रंप के बयान को पूरी तरह शाब्दिक रूप से नहीं लिया जाना चाहिए। फैक्टशीट यह संकेत देती है कि भारत ने चरणबद्ध तरीके से टैरिफ में कटौती का रास्ता चुना है, न कि सभी क्षेत्रों में एक साथ शुल्क खत्म करने का। कुल मिलाकर यह ट्रेड डील भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में एक अहम मोड़ मानी जा रही है, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएंगे।
