- समय से न्याय ना मिलने पर विपक्ष सड़क पर उतरने को मजबूर होगा
- आखिर सिस्टम के उत्पीड़न के खिलाफ सत्ता पक्ष के रहनुमा क्यों नही आते सामने
- चकबंदी विभाग की कथित कार्यप्रणाली से क्षुब्ध ग्राम संठी निवासी प्रभुनाथ प्रजापति की मौत का है मामला
आशुतोष मिश्रा
संतकबीरनगर। सियासत की डगर भी बड़ी आड़ी तिरछी चलती है। समाज की तरक्की और भलाई के लिए लंगोट पहन कर जंग लड़ने का दावा करने वाले सत्ताधारी सूरमा आखिर संठी निवासी मृतक प्रभुनाथ प्रजापति के प्रकरण पर लड़ने की बात छोड़िए बोलने से भी क्यों कतरा रहे हैं? सत्ता के शिखर पर विराजमान सुशोभित सियासी सूरमाओं की बेबसी को विपक्ष के योद्धा पूर्व विधायक अलगू प्रसाद चौहान ने अपना हथियार बना लिया। परिजनों की माने तो चकबंदी विभाग के संबंधित जिम्मेदारों की आर्थिक लोलुपता और बीमारू सिस्टम की उदासीनता का शिकार होकर गरीब परिवार के एक कमाऊ शख्स ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर लिया। क्षेत्र में एक सवाल तेजी से पूछा जा रहा है कि कहीं उस परिवार को मिले इस बड़े नासूर जख्म के पीछे किसी सत्ता के सिपहसालार को लाभ पहुंचाने की कवायद तो नही थी? धनघटा विधान सभा क्षेत्र के दो सियासी स्तंभ विधायक गणेश चौहान और जमीन पर संघर्ष के पर्याय नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि नीलमणि की इस प्रकरण पर चुप्पी का लोग अपने अपने हिसाब से मतलब निकालने में जुटे हुए हैं।
हालात की नजाकत कहें या फिर विपक्ष की तेजी इस प्रकरण को प्रदेश के सियासी क्षितिज पर सुशोभित करके पूर्व विधायक अलगू प्रसाद चौहान ने पीड़ितों के दर्द को बांटने की पहल में एक बड़ी बढ़त कायम कर लिया। पूर्व विधायक अलगू प्रसाद चौहान ने इस परिवार की लड़ाई लड़ते हुए पार्टी के पीडीए के फॉर्मूले को धनघटा के सियासी सरजमीं पर उतार कर एक नया संदेश देने का प्रयास किया है। लखनऊ पहुंच कर पर विधायक चौहान ने नेता विरोधी दल माता प्रसाद पाण्डेय और विधायक राम अचल राजभर से मिलकर स्व प्रभुनाथ प्रजापति के परिवार को न्याय दिलाने की गुजारिश किया है। उम्मीद जताई जा रही है कि 12 फरवरी को इस पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग प्रदेश की विधान सभा में उठेगी तो परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ जाएगी। इस संबंध में हुई वार्ता में सपा के वरिष्ठ नेता लालबहादुर यादव ने कहा कि स्व प्रभुनाथ प्रजापति भ्रष्ट सरकारी तंत्र का शिकार हुए हैं। पूर्व विधायक अलगू प्रसाद चौहान ने कहा कि समूची सरकार के अधिकारियों का यह उत्पीड़न सिर्फ प्रभु नाथ के परिवार ही नही प्रजापति समाज और समूचे पिछड़े वर्ग के साथ हुआ है।
