Health : अच्छी सेहत के लिए लोग दिल, लिवर, किडनी और मसल्स पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन आंखों की सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि आंखें न केवल देखने का जरिया हैं, बल्कि शरीर की कई गंभीर बीमारियों के संकेत भी देती हैं। आंखों के जरिए शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और यहां तक कि ऑक्सीजन लेवल की कमी के लक्षण भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में आंखों की देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है।
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आंखों से जुड़ी बीमारियां क्यों हैं खतरनाक
आज के समय में कैटरेक्ट, मायोपिया, ड्राई आई सिंड्रोम और ग्लूकोमा जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक 40 साल की उम्र के बाद अगर बार-बार धुंधला दिखे, सिरदर्द बना रहे या रात में रोशनी चुभने लगे, तो यह ग्लूकोमा की शुरुआती चेतावनी हो सकती है। डायबिटीज के मरीजों में इस बीमारी का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में लगभग दोगुना माना जाता है। भारत में ही ग्लूकोमा के मरीजों की संख्या करोड़ों में है।
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स्क्रीन टाइम बना आंखों का सबसे बड़ा दुश्मन
मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल आंखों की रोशनी को कमजोर कर रहा है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, सूखापन और थकान की समस्या बढ़ जाती है। आंकड़ों के मुताबिक ज्यादा फोन इस्तेमाल करने से बेचैनी, चिड़चिड़ापन और सुस्ती भी तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर आंखों और दिमाग पर पड़ता है।
बाबा रामदेव के योगिक उपाय
स्वामी रामदेव के अनुसार, आंखों की सेहत को बेहतर बनाने के लिए रोजाना प्राणायाम और योग को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम आंखों की नसों को मजबूत करने में सहायक माने जाते हैं। सुबह-शाम 20–30 मिनट प्राणायाम करने से आंखों की थकान कम हो सकती है।
आहार से बढ़ाएं नजर की ताकत
आयुर्वेद में गाजर, आंवला, शकरकंद और स्ट्रॉबेरी को आंखों के लिए बेहद फायदेमंद बताया गया है। इसके अलावा बादाम, सौंफ और मिश्री को पीसकर रात में गर्म दूध के साथ लेने से भी आंखों की कमजोरी में सुधार हो सकता है। महात्रिफला घृत और एलोवेरा-आंवला जूस का सेवन भी आंखों की रोशनी बढ़ाने में मददगार माना जाता है।
