जीवनसाथी चुनना व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता का हिस्सा है, जिसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप असंवैधानिक

Court on marriage 1755232923745 1755232932955

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़े महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि लड़का-लड़की यदि अपनी स्वतंत्र इच्छा और आपसी सहमति से विवाह करना चाहते हैं, तो इसके लिए न तो परिवार और न ही समाज की मंजूरी आवश्यक है। अदालत ने कहा कि जीवनसाथी चुनना व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता का हिस्सा है, जिसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप असंवैधानिक है। न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की एकल पीठ ने कहा कि विवाह करना व्यक्ति की व्यक्तिगत पसंद और आज़ादी से जुड़ा विषय है और यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित अधिकार है। कोर्ट ने दोहराया कि जब दो वयस्क अपनी मर्जी से शादी करते हैं, तो उनके इस निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए और इसमें राज्य, समाज या परिवार को दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।

शादी निजी स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि विवाह का अधिकार केवल सामाजिक या नैतिक अवधारणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा में भी मान्यता दी गई है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक महत्वपूर्ण पहलू है। न्यायमूर्ति बनर्जी ने कहा कि विशेष रूप से विवाह जैसे निजी मामलों में बालिग व्यक्तियों को अपने जीवन से जुड़े फैसले स्वयं लेने का पूर्ण अधिकार है। ऐसे मामलों में किसी भी तरह का दबाव, धमकी या हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं हो सकता।

ये भी पढ़े

कोटा में बड़ा हादसा: भरभराकर गिरी इमारत, दो की मौत, कई घायल…रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

 

धमकियों का मामला, कोर्ट ने दी सुरक्षा

यह टिप्पणी अदालत ने एक विवाहित दंपति की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने जुलाई 2025 में आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया था, जिसे बाद में विधिवत पंजीकृत भी कराया गया। दंपति का आरोप था कि महिला के पिता इस विवाह का विरोध कर रहे हैं और उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं, जिससे उनकी जान को खतरा बना हुआ है।

ये भी पढ़े

 

बीस साल बाद फिर मायावती का दलित-ब्राह्मण-मुस्लिम गठजोड़ फार्मूला

 

पुलिस को सुरक्षा के निर्देश

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने महिला के खिलाफ दर्ज एक एफआईआर से जुड़ी राहत की मांग वापस ले ली। इसके बाद अदालत ने दंपति की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस को आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति, विशेष रूप से महिला के पिता को, दंपति की निजी ज़िंदगी और स्वतंत्रता को खतरे में डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि बालिग नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना राज्य का दायित्व है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि आवश्यकता पड़ने पर दंपति सीधे संबंधित थाना प्रभारी या बीट अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि दंपति अपना निवास स्थान बदलते हैं, तो इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दें, ताकि उन्हें दी जा रही सुरक्षा में कोई बाधा न आए। (BNE )

Spread the love

New Delhi
Delhi homeslider

दिल्ली को दहलाने की धमकी, हाईकोर्ट, एयरपोर्ट और संसद समेत प्रमुख जगहों पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

New Delhi: लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री देश को सम्बोधित करें, इसके पहले ही दिल्ली में बम की सूचना से हड़कम्प मच गई। एक मेल से मिली धमकियों की वजह से दिल्ली पुलिस समेत देश के कई सुरक्षाबल इस मसले को सुलझाने में जुट गए। दिल्ली हाईकोर्ट समेत राजधानी के छह अलग-अलग स्थानों को […]

Spread the love
Read More
JP Nadda's health
homeslider National Politics

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की तबीयत बिगड़ी, AIIMS दिल्ली में भर्ती; एंजियोग्राफी के बाद हालत स्थिर

JP Nadda’s health: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली स्थित AIIMS में भर्ती कराया गया है। अस्पताल की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, 13 अगस्त की शाम उन्हें बेचैनी की शिकायत हुई थी। इसके बाद डॉक्टरों ने उनकी जांच की, जिसमें कोरोनरी एंजियोग्राफी भी शामिल […]

Spread the love
Read More
Racism
Analysis homeslider

दूक से रैंप तक, बस्तर की बेटियों ने बदल दी नक्सलवाद की तस्वीर

Racism बस्तर की धरती पर सबसे बड़ी खबर अब यह नहीं है कि कितनी बंदूकें बरामद हुईं, कितने नक्सली मारे गए या कितनों ने आत्मसमर्पण किया। असली खबर वह तस्वीर है, जिसमें कभी जंगलों में हथियार लेकर चलने वाली महिलाएं रायपुर के मंच पर कोसा सिल्क पहनकर रैंप पर उतरती हैं। 7 अगस्त को राष्ट्रीय […]

Spread the love
Read More