विज्ञान : सूर्य में मची भीषण हलचल ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। फरवरी की शुरुआत से ही सूर्य लगातार शक्तिशाली सोलर फ्लेयर्स छोड़ रहा है, जिनका सीधा असर पृथ्वी पर पड़ सकता है। इसरो और नासा दोनों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि भारत सहित कई देशों में रेडियो ब्लैकआउट, संचार बाधा और पावर ग्रिड फेल होने जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 1 फरवरी से सूर्य से निकलने वाले तीव्र सोलर फ्लेयर्स पृथ्वी की ओर बढ़ रहे हैं। ये फ्लेयर्स अत्यधिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से भरपूर होते हैं, जो कुछ ही मिनटों में धरती तक पहुंच जाते हैं। इसी कारण रेडियो संचार, GPS सिस्टम, सैटेलाइट लिंक और एविएशन कम्युनिकेशन पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है।
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क्या होते हैं सौर तूफान
सौर तूफान दरअसल सूर्य के अंदर होने वाले विशाल विस्फोटों का परिणाम होते हैं। जब सूर्य की चुंबकीय ऊर्जा अचानक रिलीज होती है, तो सोलर फ्लेयर्स और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) पैदा होते हैं। ये पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर से टकराकर भू-चुंबकीय गतिविधियों को तेज कर देते हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 5 फरवरी के आसपास यह गतिविधि चरम पर हो सकती है, जिसके चलते सामान्य इलाकों में भी ऑरोरा यानी नॉर्दर्न लाइट्स दिखाई दे सकती हैं।
ISRO ने क्यों जारी किया अलर्ट
इसरो ने संभावित रेडियो ब्लैकआउट को लेकर हाई अलर्ट मोड सक्रिय कर दिया है। एजेंसी के मुताबिक, तेज सौर तूफान उपग्रहों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, टीवी और मोबाइल सिग्नल बाधित कर सकते हैं और यहां तक कि बिजली ग्रिड पर भी असर डाल सकते हैं।
इसरो के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 50 से अधिक सक्रिय भारतीय उपग्रहों पर लगातार नजर रखी जा रही है। संचार, नेविगेशन और सैटेलाइट पेलोड से जुड़े सभी सिस्टम को हाई रिस्क मोड में मॉनिटर किया जा रहा है।
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सूर्य ने क्यों धरा रौद्र रूप
वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य पर सक्रिय क्षेत्र 14366 अचानक बेहद शक्तिशाली हो गया है। इसी क्षेत्र से बीते कुछ दिनों में लगातार विस्फोट हुए हैं। इनमें से एक X8.1 श्रेणी का सोलर फ्लेयर 2026 का अब तक का सबसे शक्तिशाली विस्फोट माना जा रहा है। ग्राउंड स्टेशनों और मिशन कंट्रोल सेंटर्स को पहले ही सतर्क कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
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