लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा को फोन पर धमकी, खुद को पुलिस अफसर बताकर मांगी रंगदारी, FIR दर्ज

रंजन कुमार सिंह

रांची। झारखंड भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद और लोकसभा के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट, पद्मभूषण से सम्मानित कड़िया मुंडा से रंगदारी मांगी गयी है। फोन करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर रंगदारी मांगी है। मामले में रांची साइबर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। यह धमकी फोन कॉल के जरिए दी गई है, जिसमें कॉल करने वाला खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पैसे की मांग कर रहा है। यह पहला मौका है जब 80 वर्षीय वरिष्ठ आदिवासी नेता को इस तरह की धमकी का सामना करना पड़ा है। कड़िया मुंडा के निजी सहायक डॉ. निर्मल सिंह ने इस पूरे मामले की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मोबाइल नंबर 8208746581 से लगातार कड़िया मुंडा के निजी नंबर 94311#### पर कॉल किए जा रहे हैं। कॉल करने वाला व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी बताता है और रंगदारी के रूप में पैसों की मांग करता है। साथ ही कॉल के दौरान धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल कर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश भी की जा रही है।

कड़िया मुंडा वर्तमान में अस्वस्थ चल रहे हैं। ऐसे में इस तरह के लगातार फोन कॉल और धमकियों से वे मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं। उन्होंने इस मामले को गंभीर बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इसकी जानकारी साझा की और झारखंड पुलिस तथा मुख्यमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
खूंटी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) मनीष टोप्पो ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि डॉ. निर्मल सिंह की शिकायत के आधार पर रांची के साइबर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट रूप से साइबर अपराध और रंगदारी से जुड़ा मामला है, जिसकी गहन जांच की जा रही है। एसपी मनीष टोप्पो ने आश्वासन दिया कि पुलिस इस मामले में तेजी से कार्रवाई कर रही है और जल्द ही रंगदारी मांगने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल नंबर की लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपराधी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी किसी संगठित गिरोह से जुड़ा है या यह किसी व्यक्ति की अकेली हरकत है। कड़िया मुंडा झारखंड की राजनीति में एक सम्मानित और प्रभावशाली नाम रहे हैं। वे न सिर्फ खूंटी से कई बार सांसद रह चुके हैं, बल्कि लोकसभा के उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। आदिवासी समाज के उत्थान में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण सम्मान से भी नवाजा है।

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