हिंदुस्तान का शर्मा भारत का ‘अभिषेक’

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पंजाब के अमृतसर की गलियों से निकला यह लड़का आज भारतीय क्रिकेट का चमकता सितारा है। मेहनत, अनुशासन और पिता की सीख ने इसे बड़ा बनाया। युवराज सिंह जैसे धाकड़ बल्लेबाज का अनुशासन मिला तो वह इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में खूब चमका। अब वह टीम इंडिया में है और लम्बी पारी खेलने की क्षमता रखता हैं, जिसे उसने कई मौकों पर साबित भी किया है। वो पंजाब का शर्मा है और भारत के भाल का ‘अभिषेक’।

मृगांक गुप्ता


वो 27 मार्च 2024 की शाम थी। दूधिया रोशनी से जगमगाते हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में सनराइजर्स हैदराबाद का मुंबई इंडियंस से सामना था। टीम इंडिया के जगमगाते सितारों से लकदक सजी मुम्बई के प्रशंसकों का भारी संख्या में जमावड़ा था। लेकिन जितने भी सनराईजर्स के चाहने वाले थे, उनकी नजरें आस्ट्रेलिया के धाकड़ बल्लेबाज ट्रेविस हेड पर टिकी थीं। हेड ने महज 18 गेंदों का सामना किया और अपना अर्धशतक जड़ दिया। लेकिन असली आतिशबाजी तब हुई, जब अमृतसर के इस छोरे ने अपनी बल्लेबाजी शुरू की। खब्बू बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की उस धुआंधार पारी को देखने के बाद लोगों की आंखें खुली की खुली रह गई। सिर्फ 23 गेंदों में सात छक्के और तीन चौकों से उसने मुम्बई के दिग्गज गेंदबाजों को चारों खाने चित्त कर दिया, जिसमें भारत के स्टार गेंदबाज बूम-बूम भी शामिल थे। उनकी इस पारी ने न सिर्फ मैच का रुख बदल दिया, बल्कि उन्हें देशभर की सुर्खियों में ला खड़ा किया। यहीं से बाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज और उपयोगी स्पिनर के रूप में अभिषेक की पहचान स्थापित हो गई। हालांकि, टीम इंडिया तक का सफर उनके लिए भी आसान नहीं रहा है। उन्हें कई चुनौतियों और संघर्षों का सामना करना पड़ा, लेकिन एशिया कप में शानदार प्रदर्शन के बाद अभिषेक शर्मा ने टी-20 टीम में अपनी जगह बतौर सलामी बल्लेबाज पक्की कर ली है।

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सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में एशिया कप खेलने गई भारतीय टीम ने बड़ा ही शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन दर्शकों की जेहन में एक ही नाम उभरा, वो है अभिषेक शर्मा। कभी अमृतसर की गलियों में क्रिकेट खेलने वाला यह खिलाड़ी एक दिन टीम इंडिया का सिरमौर बनेगा, यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। गौरतलब है कि अभिषेक का जन्म चार सितंबर 2000 को पंजाब के अमृतसर में हुआ है। वो तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके पिता राजकुमार शर्मा पंजाब के लिए लेफ्ट-आर्म स्पिनर रह चुके हैं। साल 1985-86 में अंडर-22 विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल तक उन्होंने टीम का हिस्सा रहते हुए क्रिकेट खेला। मगर परिस्थितियों ने उनका करियर रोक दिया और दुबई चले गए। वहां भी सफलता हाथ नहीं लगी तो वे लौटकर अपने देश आ गए और बैंक ऑफ इंडिया के लिए खेलने लगे। कुछ दिनों बाद वो अमृतसर गेम्स एसोसिएशन के कोच और चयनकर्ता भी बने। स्पिनर पिता का अधूरा सपना बेटे ने पूरा किया। देखने वाले कहते हैं कि वही जुनून अभिषेक की नसों में दौड़ रहा है। साल 2015-16 में विजय मर्चेंट ट्रॉफी में 1200 रन और 57 विकेट लेकर अभिषेक पहलेक्रिकेटर बने, जिन्होंने दो ‘राज सिंह डूंगरपुर अवॉर्ड’ जीते हैं। आईपीएल 2025 में सनराईजर्स हैदराबाद (SRH) ने उन्हें 14 करोड़ रुपये में खरीदा। कारों के शौकीन अभिषेक अब कई लग्जरी कारों के मालिक हैं, जो उनकी बढ़ती लोकप्रियता और सफलता का सबूत देता है।

अभिषेक का बल्ला एशिया कप में चला नहीं, चमका। दो लगातार अर्धशतकों के साथ शर्मा ने कुल सात पारियों में 314 रन ठोंके। शुभमन गिल के साथ मिलकर भारत को तेज शुरुआत दिलाई और लगातार अच्छी पारी खेलते रहे। अभिषेक ने मौजूदा टूर्नामेंट में यूएई के खिलाफ 30, पाकिस्तान के खिलाफ 31, ओमान के खिलाफ 38, पाकिस्तान के खिलाफ 74 और बांग्लादेश के खिलाफ 75 रनों की पारी खेली है। हालांकि पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल मैच में उनका बल्ला नहीं चला और वो छह गेंदों का सामना कर केवल पांच रन बना सके और फहीम का शिकार बन गए। अभिषेक अपने इस शानदार प्रदर्शन के दम पर टी20 रैंकिंग में नंबर एक बल्लेबाज बने। हालांकि उन्होंने पाकिस्तान से हुए तीनों मैचों में पाकिस्तान के प्रीमियर गेंदबाज शाहीन अफरीदी की जमकर खबर ली। उन्हें एशिया कप का प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया।

कौन है अभिषेक शर्मा

डीपीएस अमृतसर से शुरुआती पढ़ाई करने वाले अभिषेक का दाखिला डीएवी कॉलेज में ग्रेजुएशन के लिए हुआ था। लेकिन पढ़ाई में अव्वल अभिषेक का दिल क्रिकेट पर टिका रहा। पिता रोज उन्हें प्रैक्टिस के लिए ले जाते थे। महज 16 साल की उम्र में शर्मा ने रणजी ट्रॉफी खेला और हिमाचल प्रदेश के खिलाफ अपनी पहली ही पारी में 94 रन बनाए और एक विकेट भी झटका। तब हरभजन सिंह ने उन्हें कैप पहनाई और डेब्यू कराया। इसके पहले श्रीनगर में हुए अंडर-14 मुकाबले के दौरान महान स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने उनकी गेंदबाजी देखी और कहा कि अभिषेक एक बेहतरीन ऑलराउंडर बन सकता है। साल 2016 में अभिषेक को भारतीय अंडर-19 टीम का कप्तान बनाया गया और टीम ने इमर्जिंग एशिया कप जीता लिया। हालांकि वर्ष 2018 अंडर-19 वर्ल्ड कप में पृथ्वी शॉ को कप्तानी मिलगई, लेकिन बतौर खिलाड़ी अभिषक ने टीम में अहम योगदान दिया। तब बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने शानदार अर्धशतक जड़ा और दो विकेट भी निकाले। अभिषेक शर्मा ने अपनी 24 टी-20 पारियों में 196.07 के स्ट्राइक रेट से 849 रन बना चुके हैं। उनका टी-20 में सर्वश्रेष्ठ स्कोर 135 है, जबकि वो 78 चौके और 60 चौके जड़े हैं।

पिता की मेहनत को युवराज ने निखारा…

अभिषेक की सफलता में भारतीय टीम की मध्यक्रम की जान रहे युवराज सिंह का बड़ा हाथ है। बकौल राजकुमार शर्मा, युवराज सिंह ने अभिषेक की सफलता में बहुत बड़ा रोल निभाया है। उन्होंने उस पर कड़ी मेहनत की है। बताते चलें कि युवराज ने न सिर्फ तकनीकी सुधार कराया, बल्कि अभिषेक के लिए अनुशासन की भी नींव रखी। युवराज अब भी मजाकिया अंदाज में उन्हें टोकते रहते हैं। एक बार अभिषेक के आउट होने पर उन्होंने कहा, ‘वाह अभिषेक वाह… शानदार पारी, लेकिन जिस शॉट पर आउट हुए, वो क्या ही शानदार था! अब तुम्हारे लिए स्पेशल चप्पल इंतजार कर रही है।’ बताते चलें कि युवराज सिंह ने टी-20 में पहली बार छह गेदों पर छह छक्के जड़े थे। उनकी यह पारी आज भी सराही जाती है।

आईपीएल ने दिलाई पहचान, एशिया कप ने किया स्थापित

मिस्टर 360 के नाम से विख्यात टी-20 कप्तान सूर्य कुमार यादव की तरह इंडियन प्रीमियर लीग ने ही अभिषेक को पहचान दिलाई। साल 2024 में उनका बल्ला आग उगल रहा था। पूरे सीजन में उन्होंने 400+ रन बनाए और 180 से ऊपर का स्ट्राइक रेट रहा। उनकी बल्लेबाजी से टीम फाइनल तक पहुंची, लेकिन खिताब से चूक गई। तब अभिषेक ने 16 मैचों में 32.26 की औसत और 204.21 के स्ट्राइक रेट से 484 रन बनाए थे। जिसमें तीन अर्धशतक शामिल हैं। इसी सीजन के दम पर उनका चयन भारतीय टी20 टीम के लिए हुआ और आज वो विराट कोहली को पीछे छोड़ भारत के सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत टी20 स्कोरर हैं। साथ ही अब वह टी-20 में आईसीसी रैंकिंग में नंबर एक बल्लेबाज हैं। वहीं साल 2025 के आईपीएल सत्र में पंजाब किंग्स के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 55 गेंदों पर 141 रन की पारी खेली। यह किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा आईपीएल का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बना। साथ ही, यह आईपीएल इतिहास का तीसरा सबसे ऊंचा स्कोर भी है। इस पारी को देखकर युवराज सिंह ने उनकी तारीफ करते हुए कहा, ’98 पर सिंगल… 99 पर सिंगल! इतनी परिपक्वता…अभिषेक, यह शानदार पारी थी।’ इस सीजन में अभिषेक ने 14 मैचों में 33.76 की औसत और 193.39 के स्ट्राइक रेट से 439 रन बनाए, जिसमें एक शतक और दो अर्धशतक शामिल हैं।

पिता का सपना पूरा हुआ

‘पूत कपूत तो क्या धन संचय/पूत सपूत तो क्या धन संचय’यह कहावत भारतीय टीम के नए स्टार ओपनर पर बिल्कुल ही सटीक बैठती है। उन्होंने अपने बल्ले से केवल कीर्तिमान नहीं गढ़े हैं, बल्कि एक पिता के सपने की अधूरी कहानी को पूरा किया है। राजकुमार शर्मा ने क्रिकेट का जो रास्ता चुना था, उसे उनके बेटे ने मुकम्मल किया।

विश्व पर फतह करने को तैयार यह खूंखार टीम

टीम इंडिया हाल के दिनों में जैसा खेल रही है, उसे देखकर कोई भी कह सकता है कि यह टीम विश्व की किसी भी टीम से न तो डरने वाली है, न हारने वाली। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज शुरू होने के पहले तक टीम में एक बड़ी परेशानी थी। वो थी कप्तान सूर्या का फॉर्म में न रहना। लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ भारतीय टीम का सूर्य न केवल चमका, बल्कि खूब दमका भी। पांच मैचों की सीरीज में दाएं हाथ के इस धाकड़ बल्लेबाज ने 175 रन ठोंककर अपने आलोचकों का मुंह बंद कर दिया। इस सीरीज में सूर्या की चमक इतनी प्रखर थी कि उनके बल्ले से 150  चौके और इतने 100 छक्के लगे। इन पांच मैचों की सीरीज में सूर्यकुमार यादव ने क्रमशः 3000  की पारियां खेलीं।

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बात विश्वकप की करें तो संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा की सलामी जोड़ी के बाद टीम में तीसरे नम्बर पर छोटा डायनामाइट (इशान किशन) खेल रहा है। पहली गेंद पर छक्का मारने वाले अभिसिक्स शर्मा (प्रशंसक इसी नाम से अभिषेक को पुकारने लगे हैं) के बाद इशान किशन की बेबाक बल्लेबाजी के बूते टीम इंडिया 250 के पार जाने लगी है। पांच मैचों की सीरीज में ईशान से चार मैच खेला और 50 रन ठोंक डाले।  42 गेंदों पर शतक (102) रनों की इतनी तेज पारी खेली कि 84 रन बाउंड्री से बने। किशन ने अपनी पारी में 10 छक्के जड़े और छह चौकों से पारी को संवारा। उनके बाद चार नम्बर पर भारतीय कप्तान सूर्या की बल्लेबाजी देखने के लिए दर्शक टकटकी लगाए रहते हैं। टीम इंडिया में इन दिनों पांच नम्बर पर तगड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। मास्टर ब्लास्टर विराट कोहली के बाद मिस्टर भरोसेमंद उभरे तिलक वर्मा जहां तीन नम्बर पर तीन शतक ठोंक चुके हैं, उन्हें नम्बर-5 पर खेलना पड़ सकता है। वहीं धाकड़ बल्लेबाज रिंकू सिंह भी इसी नम्बर पर अपनी दावेदारी कर रहे हैं। हालांकि छह नम्बर पर हार्ड हिटिंग पांड्या यानी हार्दिक अपने लय में हैं और उन्हें शिवम दुबे के साथ एक नम्बर आगे-पीछे होना पड़ सकता है। शक्तिमान दुबे के उपमान से चर्चित हो रहे शिवम दुबे जिस तरह से स्पिनरों की धुलाई करते हैं, उन्हें कभी छह तो कभी सात नम्बर पर टीम प्रबंधन बल्लेबाजी करा सकता है। इसके बाद ऑलराउण्डर अक्षर पटेल का नम्बर आ सकता है, यदि उनका चयन टीम-11 में हो तो। उसके बाद की स्थिति में वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और जसप्रीत बुमराह की जगह पक्की है। यानी कुलदीप यादव और अक्षर पटेल में कड़ी प्रतिस्पर्धा इस विश्वकप में देखने को मिल सकती है। वहीं टीम संतुलन की बात करें तो अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा और रिंकू सिंह पार्ट टाइम गेंदबाजी कर सकते हैं। जबकि हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे बतौर ऑलराउंडर टीम में खेल रहे हैं। दोनों की बल्लेबाजी किसी भी विपक्षी टीम को हवा में उड़ाने के लिए काफी है। यानी कहा जा सकता है कि टीम इंडिया इस बार फिर विश्वकप फतह कर सकती हैं। हां, कई खिलाड़ियों को बाहर से मैच देखना पड़ सकता है।

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