लखनऊ। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित शताब्दी समारोह का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की निरंतरता और उसकी जीवंत परंपरा का उत्सव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने समय के हर दौर में स्वयं को जीवित रखा है। संगीत, नृत्य और कला ने समाज को न केवल सौंदर्यबोध दिया, बल्कि राष्ट्रीय चेतना को भी मजबूत किया। योगी आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा कि जब तक संस्कृति सुरक्षित है, तब तक राष्ट्र सुरक्षित है।
उन्होंने भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक सफर को याद करते हुए बताया कि वर्ष 1926 में पंडित विष्णु नारायण भातखंडे ने लखनऊ में संगीत शिक्षा को व्यवस्थित रूप देने के उद्देश्य से एक संस्थान की नींव रखी थी। उस समय अवध की सांस्कृतिक भूमि ने इस प्रयास को व्यापक समर्थन दिया और यह संस्थान आगे चलकर भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रमुख केंद्र बना।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित भातखंडे और पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर जैसे संगीत साधकों ने भारतीय संगीत को घरानों और परंपराओं से निकालकर शैक्षणिक ढांचे में स्थापित किया। इसी कारण आज भारतीय संगीत विश्वभर में सम्मान के साथ सुना और सिखाया जाता है। योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति और कला को केवल विरासत नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों के रूप में अपनाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में भी भारतीय संगीत और संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।
