देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सहारनपुर चौक स्थित गुरुद्वारे पहुंचकर माफी मांगी और जोड़ा सेवा संगत की। हरीश रावत ने कहा कि सिख समाज के लोग शौर्य के प्रतीक हैं। हाल में ही हरक सिंह रावत रावत के दिए गए विवादित बयान के बाद सिख समुदाय में खासा आक्रोश नजर आ रहा है, जहां बीते दिनों हरक सिंह रावत के पुतले जलाए गए और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की बात कही गई। इस दौरान सिख समुदाय ने सतनाम के झंडों और तलवारों को लेकर पूर्व काबीना मंत्री हरक सिंह रावत के आवास का घेराव किया और उनके घर के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
सिख समुदाय का कहना है कि हरक सिंह रावत द्वारा जो माफ़ी मांगी गई है। वह इस बयान के लिए काफी नहीं है और उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की जरूरत है। सिखों के गुस्से को भांपते हुए हरीश रावत ने बीच-बचाव करते हुए आए और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की गलती पर खुद गुरुद्वारे में जोड़ा सेवा संगत और लंगर सेवा की। बहरहाल, हरक सिंह रावत सिखों से माफी मांग ली है और पांवटा साहिब गुरुद्वारा में जाकर जूता सेवा भी की थी। दरअसल, उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव है और विधानसभा चुनावों में लगभग एक साल का समय रह गया है और 2017 से कांग्रेस उत्तराखंड की सत्ता से बाहर है। 2027 के विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस को सत्ता वापसी करने के लिए एड़ी चोटी का जोर अभी से लगाना शुरू कर दिया है।
गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह के बयान के बाद सिख समाज में रोष है तो वहीं कांग्रेस भी अपने आप को असहज महसूस कर रही है। कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत आढ़त बाजार गुरुद्वारे में पहुंचे और अरदास की। साथ ही उन्होंने जोड़ा सेवा संगत के जूते रखने का स्थान में जूते साफ किए। उन्होंने कहा कि जो गलती हुई है हम सिख समुदाय से उसकी माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ सदस्य होने के नाते जो गलती हुई है उसकी माफी मांगी है और इसका प्रायश्चित किया है। अब सिर्फ राजनीतिक चमकाने के लिए यह बयान बाजी की जाएगी,लेकिन महान सिख समुदाय ने हमें क्षमा कर दिया है।
