पश्चिम बंगाल में BJP का छह माह में UCC, महिलाओं को तीन हजार महीना वाला मास्टरस्ट्रोक

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संजय सक्सेना

भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है, जिसमें भय बनाम भरोसे के मुद्दे को केंद्र में रखकर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का आह्वान किया गया है। पार्टी के इस घोषणा पत्र में सबसे प्रमुख और प्रभावशाली वादा सरकार बनने के मात्र छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी  को लागू करने का है, जिस पर तृणमूल नेत्री और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी अपनी पार्टी का पक्ष रखना पड़ेगा। ममता इसका विरोध करेंगी तो हिन्दू वोटर और समर्थन करेंगी तो मुस्लिम वोटर उनसे दूर जा सकता है। बीजेपी ने इसके साथ ही महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक महिला को हर महीने तीन हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की है, जो राज्य की मौजूदा राजनीति में एक मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। भाजपा ने अपने इस पत्र के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह बंगाल में तुष्टीकरण की राजनीति को समाप्त कर कानून का शासन और सर्वांगीण विकास का नया अध्याय शुरू करना चाहती है। घोषणा पत्र में बंगाल की अस्मिता, सुरक्षा और समृद्धि को आधार बनाकर कई ऐसे वादे किए गए हैं, जो समाज के हर वर्ग को छूने का प्रयास करते हैं।

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समान नागरिक संहिता का वादा न केवल सामाजिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि इसे भाजपा की विचारधारा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता के रूप में भी देखा जा रहा है। इसके अतिरिक्त महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए पार्टी ने लक्ष्मी भंडार जैसी मौजूदा योजनाओं के जवाब में तीन हजार रुपये की बड़ी राशि का संकल्प लिया है, ताकि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। शिक्षा के क्षेत्र में भाजपा ने बांग्ला भाषा को प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक अनिवार्य करने और तकनीकी पाठ्यक्रमों को स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराने की बात कही है, जिससे बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी। कृषि क्षेत्र के लिए भी इस संकल्प पत्र में विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिनमें किसानों को प्रति वर्ष मिलने वाली आर्थिक सहायता में वृद्धि और फसलों के उचित मूल्य की गारंटी शामिल है। इसके अलावा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने हेतु राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और बंद पड़ी जूट मिलों को पुनर्जीवित करने का खाका खींचा गया है। घोषणा पत्र में भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहनशीलता की नीति अपनाते हुए सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता लाने और भर्ती घोटालों की जांच के लिए विशेष आयोग गठित करने का वादा किया गया है।

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स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को सुधारने के लिए राज्य में आयुष्मान भारत योजना को तत्काल प्रभाव से लागू करने की बात कही गई है, जिससे गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ की समस्या को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए आधुनिक तकनीक और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती का संकल्प भी इस घोषणा पत्र का अहम हिस्सा है।पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शक्तिपीठों के विकास और धार्मिक पर्यटन केंद्रों के सौंदर्यीकरण की योजना भी पेश की गई है। भाजपा ने अपने इस चुनावी दस्तावेज में मछुआ समुदाय और अनुसूचित जाति व जनजाति के कल्याण के लिए विशेष वित्तीय पैकेज और आरक्षण के लाभों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। आधारभूत संरचना के विकास के लिए नई सड़कों, पुलों और शहरी सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया गया है, ताकि बंगाल को निवेश के लिए एक आकर्षक केंद्र बनाया जा सके।

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राज्य की कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए पुलिस बल के आधुनिकीकरण और राजनीतिक हिंसा को पूरी तरह समाप्त करने का वादा करते हुए भाजपा ने जनता को एक भयमुक्त वातावरण देने का भरोसा दिलाया है।

घोषणा पत्र में विशेष रूप से चाय बागान श्रमिकों के वेतन में वृद्धि और उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए विशेष आवास योजना का जिक्र किया गया है। पर्यावरण संरक्षण और सुंदरबन जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के विकास के लिए भी एक समर्पित कार्ययोजना तैयार करने की बात कही गई है।

इस संकल्प पत्र के माध्यम से भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका लक्ष्य केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन है। प्रत्येक घर को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी लाने और गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी सुधारने का भी संकल्प लिया गया है।

कुल मिलाकर भाजपा का यह घोषणा पत्र एक ऐसे बंगाल की परिकल्पना करता है, जहां विकास की धारा अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और सांस्कृतिक गौरव के साथ-साथ आर्थिक प्रगति के नए आयाम स्थापित हों। यह घोषणा पत्र आगामी चुनावों में पार्टी के लिए एक प्रमुख वैचारिक हथियार साबित होगा, जो मतदाताओं के सामने भविष्य का एक स्पष्ट खाका प्रस्तुत करता है।

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