ए अहमद सौदागर
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक बेहद संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। पांच महीने की चचेरी बहन के साथ दुष्कर्म और हत्या के दोषी प्रेमचंद उर्फ पप्पू दीक्षित की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया है। हालांकि, कोर्ट ने साफ कर दिया कि दोषी को जीवन की आखिरी सांस तक जेल में रहना होगा और उसे किसी तरह की रियायत या समय से पहले रिहाई का कोई लाभ नहीं मिलेगा।
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यह मामला फरवरी 2020 का है, जब लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र में एक शादी समारोह के दौरान यह दिल दहला देने वाली वारदात हुई थी। आरोपी पप्पू दीक्षित, जो पीड़िता का चचेरा भाई था। उसने16 फरवरी 2020 को बच्ची को खिलाने-पिलाने के बहाने उसकी मां की गोद से ले लिया। कुछ देर बाद बच्ची का शव पास की झाड़ियों में नग्न अवस्था में मिला। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ बलात्कार और गंभीर चोटों की पुष्टि हुई, जिससे उसकी मौत हो गई।
ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा
घटना स्थल से मिले सबूतों ने आरोपी को कठघरे में खड़ा किया। पुलिस को उसकी शर्ट का बटन और सिर के तीन बाल बरामद हुए, जो फॉरेंसिक जांच में बच्ची के शरीर से मिले नमूनों से मैच कर गए। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मड़ियांव थाने में 17 फरवरी 2020 को मुकदमा दर्ज हुआ। ट्रायल कोर्ट ने 30 सितंबर 2021 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।
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‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस नहीं
दोषी की अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपराध की जघन्यता को स्वीकार किया, लेकिन फांसी को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में नहीं माना। कोर्ट ने तर्क दिया कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उसके तीन-चार साल का एक छोटा बच्चा है और अपराध पूर्व नियोजित नहीं लगता। बेंच ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित इस मामले में सुधार की गुंजाइश को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा को इतना सख्त रखा कि दोषी को जीवन भर जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ेगा।
