दो सौतन एक पति के साथ कैसे रहती हैं खुश जानें इसका राज…

  • दो सौतन का प्यार जानकर आप भी रह जाएंगे दंग, दो पत्नियां, एक पति के साथ कैसे रहती हैं खुश?
  • दो सौतन का एक पति और दोनों की करवाचौथः तीनों खुश, क्या है कारण आप भी जान लीजिए…
  • आगरा के इस वीडियो ने मचाया बवाल, पति बोला- ‘हम तीनों एक साथ खुश हैं’

लखनऊ। संतकबीर नगर की एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर कई बार वायरल हुआ। उस वीडियो में एक महिला अपने तीन पतियों के साथ खुश नजर आ रही थी। लेकिन यहां एक पति के साथ दो पत्नियों का मामला सामने आया है। दोनों पत्नियां अपने इकलौते पति के साथ खुश है। यूपी की ताजनगरी में इस त्योहार पर एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सामाजिक मान्यताओं और रिश्तों की पारंपरिक परिभाषा पर एक नई बहस छेड़ दी है। यहां एक ही छत के नीचे रहने वाली दो पत्नियों ने अपने एक ही पति के लिए न केवल पूरी श्रद्धा से करवाचौथ का व्रत रखा, बल्कि एक साथ पूजा-अर्चना कर पति के हाथ से जल ग्रहण किया। इस घटना का वीडियो जब सोशल मीडिया पर आया, तो देखते ही देखते वायरल हो गया और यह अनोखा परिवार पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। करवा चौथ भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के अटूट प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाने वाला त्योहार है। इस दिन सुहागिनें अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चांद का दीदार कर अपना व्रत खोलती हैं।

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यह घटना आगरा के एत्माद्दौला थाना क्षेत्र के नगला बिहारी इलाके की है। यहां के निवासी रामबाबू निषाद की दो पत्नियां हैं, और दोनों ही उनके साथ एक ही घर में रहती हैं। करवाचौथ के दिन, जब पूरा देश इस त्योहार के रंग में रंगा था, तब रामबाबू के घर का नज़ारा कुछ अलग ही था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रामबाबू की दोनों पत्नियां पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी हैं। दोनों ने एक साथ पूजा की थाली तैयार की और चंद्रमा के उदय होने का इंतजार किया। जैसे ही चांद ने आसमान में अपनी चमक बिखेरी, दोनों ने एक साथ चंद्रमा को अर्घ्य दिया और छलनी से पहले चांद को और फिर अपने पति रामबाबू के चेहरे को निहारा। यह दृश्य किसी भी सामान्य भारतीय परिवार जैसा ही था, बस फर्क इतना था कि यह सब करने वाली एक नहीं, बल्कि दो महिलाएं थीं, और दोनों का सुहाग एक ही पुरुष था। पूजा की रस्मों को पूरा करने के बाद, दोनों पत्नियों ने बारी-बारी से अपने पति रामबाबू के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया और उनके गले में फूलों की माला पहनाई। इसके बाद सबसे भावुक पल आया, जब रामबाबू ने एक ही समय पर अपनी दोनों पत्नियों को अपने हाथों से पानी पिलाकर उनका व्रत संपन्न करवाया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान तीनों के चेहरों पर खुशी और आपसी सौहार्द का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था, जिसने देखने वालों को आश्चर्य में डाल दिया। जहां समाज में एक ‘सौतन’ का नाम ही कलह और विवाद का पर्याय माना जाता है, वहीं इस परिवार ने प्रेम और आपसी समझ की एक नई मिसाल पेश की।

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कौन हैं रामबाबू निषाद और क्या है इस अनोखे परिवार की कहानी?

जब यह वीडियो वायरल हुआ तो हर कोई इस परिवार के बारे में जानना चाहता था। रामबाबू निषाद एक सामान्य व्यक्ति हैं जो अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। जब उनसे उनके इस अनोखे रिश्ते के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के अपनी बात रखी। रामबाबू ने मीडिया को बताया कि उनकी दोनों पत्नियां आपसी सहमति और खुशी से एक साथ रहती हैं। उनका मानना है कि जहां सच्चा प्यार और आपसी समझ होती है, वहां किसी भी तरह के झगड़े या कलह की कोई गुंजाइश नहीं होती। उन्होंने कहा, “हम तीनों अपने जीवन में बहुत खुश हैं और हमें एक-दूसरे से कोई शिकायत नहीं है। हम एक सामान्य परिवार की तरह ही अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं।” रामबाबू के अनुसार, उनकी पत्नियां एक-दूसरे को बहन की तरह मानती हैं और घर के सभी काम मिलकर करती हैं। त्योहारों से लेकर रोजमर्रा के जीवन तक, वे हर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देती हैं।

सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण: क्या कहता है भारत का कानून?

रामबाबू निषाद का परिवार भले ही आपसी प्रेम और सौहार्द का दावा कर रहा हो, लेकिन भारतीय कानून के नजरिए से यह रिश्ता जटिल है। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत, भारत में एक पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरा विवाह करना गैर-कानूनी है और इसे द्विविवाह (Bigamy) की श्रेणी में रखा जाता है, जो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 494 के तहत एक दंडनीय अपराध है। कानूनी तौर पर, केवल पहली पत्नी को ही मान्यता प्राप्त है। हालांकि, इस मामले में किसी भी पक्ष द्वारा कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है और तीनों ही वयस्क अपनी मर्जी से इस व्यवस्था में रह रहे हैं। यह मामला सामाजिक ताने-बाने की उस जटिलता को भी दर्शाता है, जहां व्यक्तिगत रिश्ते और आपसी सहमति कभी-कभी कानूनी प्रावधानों से अलग एक समानांतर दुनिया में मौजूद होते हैं। यह परिवार कानून की नजर में भले ही मान्य न हो, लेकिन अपनी सामाजिक इकाई में वे एक साथ जीवन बिता रहे हैं।

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सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़

इस वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की जैसे बाढ़ आ गई। इंटरनेट पर यह मामला दो ध्रुवों में बंट गया। कुछ लोग जहां इस परिवार की आपसी समझ और प्रेम की प्रशंसा कर रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग इसे सामाजिक और नैतिक रूप से गलत ठहरा रहे हैं। एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “भाई, आपको सलाम है! लोग एक पत्नी नहीं संभाल पाते, आप दो के साथ खुशी-खुशी रह रहे हैं।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “आज के जमाने में ऐसा प्यार देखना दुर्लभ है।” वहीं, आलोचना करने वालों ने इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताया और सवाल उठाया कि इस तरह के रिश्तों को कैसे सामान्य माना जा सकता है। कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “अब यही देखना बाकी रह गया था।” इन मिली-जुली प्रतिक्रियाओं के बीच यह वीडियो लगातार साझा किया जा रहा है और ट्रेंडिंग टॉपिक बना हुआ है।

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ताजनगरी में चर्चा का केंद्र बना निषाद परिवार

यह मामला अब केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि आगरा और उसके आसपास के इलाकों में भी यह चर्चा का एक गर्म विषय बन गया है। रामबाबू निषाद का घर और उनका परिवार स्थानीय लोगों के लिए किसी कौतूहल से कम नहीं है। लोग उनके घर के पास से गुजरते हुए उनके बारे में बातें करते हैं। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि कैसे व्यक्तिगत जीवन की एक झलक भी आधुनिक संचार माध्यमों के जरिए पल भर में सार्वजनिक चर्चा का विषय बन सकती है। यह कहानी प्यार, रिश्ते, सामाजिक मानदंडों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सीमाओं पर एक महत्वपूर्ण संवाद को जन्म देती है, जिसका कोई आसान उत्तर नहीं है।

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