गांधीवादी सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी की अनसुलझी गांठ

Untitled 8 copy 4
निशिकांत ठाकुर
 निशिकांत ठाकुर

जब ज्वालामुखी फट जाता है और आग का दरिया तांडव मचाने बहने लगती है, तो उसके बाद हाय हाय करते हुए हम लकीर पीटने लगते हैं। जब बादल फटता है, भयंकर नुकसान कर देता है, तो अपनी गलतियों को छिपाने के लिए पर्यावरण पर दोष मढ़ने लगते हैं। लेकिन, ऐसा क्यों? बड़ा ही गंभीर विषय है, जो हमारे देश के समक्ष अभी मुंह फाड़कर खड़ा हो गया है। जब सीमा पार से आतंकी घात लगाकर हमारे अपनों को मार जाते हैं, उसके बाद हम क्या करते हैं, यह बताने का कोई औचित्य नहीं है। हमारी खुफिया एजेंसी हर मामले में असफल क्यों साबित हो जाती है? अब यदि इसकी कोई बात करे, तो उसे आरोपित ही नहीं, द्रेशद्रोही साबित करने की होड़ मच जाती है और उस पर कई तरह के गंभीर आरोप लगने लगते हैं। यह भी हो सकता है कि उसे विदेशी षड्यंत्रकारी के नाम पर जासूस बना दिया जाता है, कभी देशद्रोही साबित कर दिया जाता है। सच्चाई यह होती है कि हम दूसरों की ओर जब एक अंगुली उठाते हैं, तो यह नहीं देखते कि  तीन अंगुलियां हमारी ही ओर घूमी होती हैं। पाकिस्तानी आतंकियों ने पहलगाम घूमने गए 26 पर्यटकों को मार दिया। हम उन आतंकियों को रोक नहीं सके। फिर बाद में लकीर पीटते सिंदूर आपरेशन नाम से युद्ध भी लड़ा गया, अब फिर वही हुआ है कि लद्दाख के डीजीपी एसडी जम्बाल ने विश्वस्तरीय पर्यावरणविद् और रमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता तथा सैद्धांतिक रूप से गांधीवादी सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद खुलासा किया है वह पाकिस्तानी जासूस के संपर्क में थे।

ये भी पढ़े

‘बुलडोजर चलवाना मतलब कानून तोड़ना’

बता दें कि पिछले बुधवार को लेह में चार लोगों की मौत और आगजनी की घटनाओं के बाद पुलिस फायरिंग में 90 से अधिक लोग जख्मी हो गए थे। सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और उन्हें  जोधपुर जेल भेजने के बाद पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि सोनम वांगचुक के साथ संपर्क में रहने वाले एक पाकिस्तानी जासूस को भी गिरफ्तार किया है जिसने वांगचुक के विरोध प्रदर्शनों के वीडियो सीमापर भेजे हैं। डीजीपी ने कहा है कि उनकी पाकिस्तान-बांग्लादेश की यात्राओं की भी जांच की गई। डीजीपी ने यह भी कहा कि लद्दाख में खास एजेंडे के तहत आंदोलन का प्रयोग किया गया। यह बात समझ से परे है कि आखिर पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का मन अचानक भारत के प्रति इतना विद्रोही क्यों हो गया? क्या उनपर जो आरोप लगाया जा रहा है, वह सही है या मनगढ़ंत। यदि गलत है, तो न्यायालय से तो वह बाहर निकल ही जाएंगे; क्योंकि भारतीय न्यायालय ऐसे विवादों का सही निर्णय देता रहा है, लेकिन तब तक सोनम वांगचुक की जो छवि अब तक बनी थी, वह जरूर नष्ट हो जाएगी। लेकिन, तब भी यह प्रश्न अनुत्तरित रह जाएगा कि इतना कुछ होने के बावजूद क्या हमारी खुफिया एजेंसियों और पुलिस के पास इस तथाकथित षड्यंत्र की कोई जानकारी नहीं थी।

एक सामान्य नागरिक के गले के नीचे यह बात नहीं उतर रही है कि हमारी इतनी बड़ी बड़ी संस्थाओं को क्यों इस बात की भनक तक नहीं लग सकी कि देश के विरुद्ध देश में ही बैठकर इतना बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है? चाहे पुलवामा हो चाहे, पहलगाम हो अथवा लेह लद्दाख हम बाद में लकीर क्यों पीटने लगते हैं! जो आपके समक्ष नहीं  है, आपके मुखातिफ नहीं है, उनपर आप कोई भी आरोप लगा दें, जवाब तो उस पक्ष से मिलेगा नहीं, लेकिन सत्य तो एक न एक दिन सामने आएगा ही। आज देश में जगह जगह गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं, लोग लामबंद हो रहे हैं, लेकिन सरकार ने तो उन्हें हजार किलोमीटर दूर जोधपुर जेल में बंद कर दिया। अब आप प्रदर्शन करते रहिए, लामबंद होते रहिए, जब तक सरकार की आंखे नहीं खुलेंगी, सोनम वांगचुक जेल से बाहर नहीं आ सकते। उनकी जो मांग थी, वह तो संविधान सम्मत ही तो थी। वह कोई देश विरोधी बयान भी जारी नहीं कर रहे थे। फिर उन्हें गिरफ्तार इसलिए किया गया, क्योंकि उन पर आरोप लगाया गया कि लेह में प्रदर्शन और आगजनी की घटनाओं के बाद पुलिस की गोली से 90 लोगों के घायल होने की घटनाओं के सूत्रधार सोनम वांगचुक ही हैं और यह सारा कृत्य उन्हीं के निर्देशन में किया गया। यह भी अजीब तर्क है कि हमारी पुलिस पुलवामा और पहलगाम के षड्यंत्रकारियों को सजा दिलवाने में लगभग असफल रही है, लेकिन सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसे इतनी सारी जानकारियां कैसे और किस तरह मिल गईं, जिन्हें तत्काल उजागर कर दिया गया।

ये भी पढ़े

इंदिरा गांधी राजनीतिक भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार

आंदोलन का उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत 31 अक्टूबर, 2019 को अस्तित्व में आए केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में लेह स्पीक बॉडी द्वारा पूर्ण राज का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग की गई है। लद्दाख के लिए अलग से लोकसेवा आयोग स्थापित करने और लद्दाख के लिए दो लोकसभा सीटें सुनिश्चित करने की भी मांग की जा रही हैं। वहां वर्तमान में केवल एक संसद सदस्य चुना जाता हैं, साथ ही विधानसभा की मांग भी की जा रही है। इन्हीं मांगों के लिए सोनम वांगचुक अनशन पर थे और उनका अनशन गांधी जयंती 2 अक्टूबर को समाप्त होने वाला था, जिन्हें उनकी गिरफ्तारी के बाद समाप्त कर दिया गया। अभी वह जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। लेख लिखे जाने तक लेह में कर्फ्यू जारी था। लोकसभा में विपक्षी दलों के नेता राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी को घेरते हुए लद्दाख के निवासियों की संविधान की छठी अनुसूची की मांग का समर्थन किया है तथा उन्होंने इससे पहले सोनम वांग़चुक की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए इसे सरकार की भयंकर भूल बताई है। जेल में बंद सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमों ने पति के खिलाफ पाकिस्तान के साथ संबंध होने और वित्तीय अनियमितताओं का खंडन किया है। उनका कहना है किे वांगचुक गांधीवादी तरीकों से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन 24 सितंबर को सीआरपीएफ की कार्यवाही के कारण स्थिति बिगड़ गई।

कहते हैं कि सफलता कोई एक दिन में नहीं मिलती। सभी सफल इतिहास में पुरुषों ने संघर्ष किया, तभी वे इतिहास पुरुष हैं। ऐसा इसलिए भी कि महात्मा गांधी अंग्रेजी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए वर्षों संघर्ष किया, 12 बार जेल गए, जहां उन्होंने 2338 दिन गुजारे। इसी तरह दक्षिण अफ्रीका के अश्वेत नेता नेल्सन मंडेला को नेता के रूप में स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने रंगभेद आंदोलन के जोर पकड़ने के साथ ही प्रतिरोध के सशक्त प्रतीक बन गए। उन्होंने अपनी आजादी के लिए राजनीतिक स्थिति से समझौता करने से सदैव इनकार किया। अपनी 27 वर्षीय जेल यात्रा के बाद फरवरी 1990 में रिहा किए गए। कई ऐसे इतिहास पुरुष रहे हैं, जिनका जेल से अटूट संबंध रहा है और वे तब तक जनहित में चट्टान की तरह खड़े रहे, जब तक अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हुए। वैसे, उन महान इतिहास पुरुषों से हम सोनम वांगचुक की तुलना नहीं कर रहे हैं, लेकिन इतना तो है ही कि यदि वह देश के साथ आंतरिक से रूप से भितरघात कर रहे थे, तो इसकी खोज की जाए। यदि देश के प्रति जरा भी उन्होंने अमर्यादित कार्य किया हो, तो उनको कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए। कोई कितना ही बड़ा क्यों न हो, वह यदि राष्ट्र का अहित करता है, तो भारत में प्रचलित नियमों के आधार पर कानून सम्मत कार्यवाही होनी चाहिए, लेकिन जांच किसी निष्पक्ष संस्था द्वारा हो तभी जनभावना को सरकारी जांच पर विश्वास होगा, अन्यथा यह एक राजनीतिक प्रपंच ही माना जाएगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं)

Spread the love

homeslider Uttar Pradesh

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के पहले मुसाफिर बने योगी

किया उद्घाटन, अब आसान और तीव्रगति से होगा सफर Gorakhpur Link Expressway : CM योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का लोकार्पण शुक्रवार को किया था। खास बात यह कि वह स्वयं इस एक्सप्रेसवेस के पहले मुसाफिर बने। आजमगढ़ के सलारपुर से मुख्यमंत्री योगी ने अपने वाहनों के काफिले के साथ इस एक्सप्रेसवे की यात्रा […]

Spread the love
Read More
Rape
Delhi homeslider Uttar Pradesh

महिला पहलवानों के आरोपों वाले मामले में बृजभूषण शरण सिंह को मिली राहत

Rape बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत, यौन उत्पीड़न केस में कोर्ट ने किया बरी भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को सुनाए गए फैसले में बृजभूषण शरण सिंह और […]

Spread the love
Read More
Train fire 
Bihar Crime News homeslider

सहरसा में पैसेंजर ट्रेन में भीषण आग, जलकर खाक हुआ पूरा कोच

Train fire  सहरसा/बिहार। बिहार के सहरसा जिले से सोमवार तड़के एक बड़ी रेल दुर्घटना की खबर सामने आई। सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर खड़ी समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन (संख्या 63344) के इंजन से जुड़े एक कोच में अचानक भीषण आग लग गई। आग की लपटें देखते ही ट्रेन में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि […]

Spread the love
Read More