
Lucknow: उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों या अन्य दुर्घटनाओं में घायल होने वाले गोवंश को अब तत्काल इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को अधिकारियों और गो सेवा आयोग के पदाधिकारियों के साथ बैठक में प्रदेश के सभी जिलों में गोवंश के लिए आपातकालीन बचाव और त्वरित उपचार की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए।
बैठक में गोवंश संरक्षण, गोशालाओं के बेहतर प्रबंधन, पशुओं के स्वास्थ्य और भविष्य की कार्ययोजना को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सरकार की ओर से गोवंश के इलाज के साथ-साथ गोशालाओं में उपलब्ध सुविधाओं की नियमित निगरानी पर भी विशेष जोर दिया गया है।
गोशालाओं की व्यवस्था पर रहेगी नजर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गोशालाओं का निरीक्षण सिर्फ खामियां तलाशने तक सीमित न रहे। निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली समस्याओं का तय समयसीमा में समाधान भी सुनिश्चित किया जाए। गोशालाओं में पशुओं के लिए पर्याप्त भोजन, हरा चारा, भूसा, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था की नियमित जांच करने को कहा गया है।
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बीमार, कमजोर और अधिक देखभाल की जरूरत वाले गोवंश के लिए अलग से व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही नर, मादा, युवा और बीमार पशुओं की जरूरत के अनुसार अलग-अलग प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण
मुख्यमंत्री ने गोवंश को लम्पी स्किन डिजीज और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाने के लिए समयबद्ध टीकाकरण अभियान चलाने और बीमार पशुओं को जल्द उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि पशुओं के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पंचगव्य आधारित चिकित्सा पर शोध को बढ़ावा
बैठक में पंचगव्य आधारित चिकित्सा की संभावनाओं को लेकर वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा और राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, लखनऊ में इस क्षेत्र से जुड़े शोध एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।
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गोवंश संरक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था जोड़ने की तैयारी
सरकार गो-संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है। महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), किसानों और गोपालकों को गोबर तथा गोमूत्र आधारित उत्पादों के निर्माण, पैकेजिंग, मूल्यवर्धन और मार्केटिंग से जोड़ने की योजना पर चर्चा हुई।
गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद, जीवामृत, बीजामृत, प्राकृतिक कीट नियंत्रक और बायोगैस जैसे उत्पादों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया। इससे किसानों और गोपालकों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर है।
बैठक में गोवंश संरक्षण में किसानों और गोपालकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत 10 गोवंश रखने वाले लाभार्थियों को कैटल शेड, बायोगैस संयंत्र और यूरिन टैंक जैसी सुविधाओं से जोड़ने का सुझाव दिया गया।
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